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Palwal News: कृषि भूमि की कीमतों पर भी दिख सकता है कलेक्टर रेट का असर

Wed, 30 Jul 2025 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
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शहर के पास के गांवों में जमीन के रेट बढ़ने के आसार, सुझाव और आपत्तियों के लिए आज भर का मौका
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिला प्रशासन ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कलेक्टर रेट निर्धारित करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। कृषि भूमि की कीमतों पर भी कलेक्टर रेट का असर दिख सकता है। प्रशासन की ओर से प्रस्तावित दरें वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी गई हैं। आमजन से 31 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। कलेक्टर रेट में प्रस्तावित बदलावों का असर पूरे जिले में जमीन की खरीद-फरोख्त, स्टांप शुल्क, रजिस्ट्री दरों और रियल एस्टेट निवेश पर पड़ सकता है।

शहर और इसके आसपास के शहरी गांवों में कलेक्टर रेट पहले से ही ऊंचे हैं। मुख्य बाजार क्षेत्र, एसआरएस ग्रुप सेक्टर-6 और सेक्टर 2, 6, 7 जैसे क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की वजह से रेट अधिक हैं। यहां जमीन की सबसे ज्यादा रजिस्ट्री भी होती है। विकसित हाउसिंग प्रोजेक्ट, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश की संभावनाएं यहां की दरें बढ़ा रही हैं। दूसरी ओर, बहीन तहसील के गांवों और अरावली से लगे क्षेत्रों में जमीन की दरें काफी कम हैं। इन क्षेत्रों में विकास की रफ्तार धीमी है। सिंचाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। इससे यहां की जमीनों में रजिस्ट्री भी कम होती है।
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कृषि भूमि पर भी असर
कलेक्टर रेट में संभावित बदलावों का असर कृषि भूमि की कीमतों पर भी दिखेगा। अलावलपुर, उलेंटा, अमरपुर जैसे गांवों में नहरी भूमि की मांग और एक्सप्रेसवे की नजदीकी की वजह से निवेश बढ़ा है, जिससे इनकी दरें शहर के नजदीक पहुंच चुकी हैं।

निवेश और विकास की दिशा होगी प्रभावित
रेट में बदलाव से जमीन की सरकारी कीमत बढ़ेगी, जिससे स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क भी बढ़ बढ़ेगा। इससे जहां रियल एस्टेट निवेश की रणनीतियां प्रभावित होंगी। वहीं, सरकारी मुआवजे, आवास योजनाओं और ग्रामीण विकास परियोजनाओं की लागत भी बदलेगी।
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प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय रहते वेबसाइट, तहसील या उपमंडल कार्यालय में जाकर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराएं, ताकि जनहित को ध्यान में रखते हुए अंतिम दरों को पारदर्शी तरीके से तय किया जा सके। शहर और उससे जुड़े शहरी गांवों में जमीन की मांग, दरें और रजिस्ट्री तीनों ज्यादा हैं। वहीं दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों में दरें कम और गतिविधि सीमित है। कलेक्टर रेट में प्रस्तावित बदलाव से ज़मीन संबंधी हर गतिविधि पर असर पड़ने वाला है।
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