पलवल। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पलवल द्वारा जिले में मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सोयल हैल्थ कार्ड) बनाने का अभियान तेज कर दिया गया है। भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए भूमि एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला में किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जा रहे हैं। अभी तक जिले में करीब ढाई लाख किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
यह जानकारी देते हुए कृषि उपनिदेशक डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना वर्ष 2015 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई। इसमें खेतों की मिट्टी व पानी की गुणवत्ता का अध्ययन करके एक कार्ड बनाया जा रहा है, ताकि किसान फसल की पैदावार के दौरान जरूरत के अनुसार ही रसायनिक खादों का प्रयोग करें ताकि किसानों को अच्छी फसल मिले। इस अभियान के पहले चरण में पलवल जिले में 1 लाख 23 हजार 269 किसानों तो वहीं दूसरे चरण में 1 लाख 11 हजार 353 किसानों को यह कार्ड जारी किए गए हैं।
वर्ष 2020 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने के कार्य को पायलेट प्रोजक्ट के तौर पर किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिले में चार गांवों को चिन्हित किया गया है। विभागीय टीम ने गांवों में जाकर 406 किसानों के खेतों की मिट्टी व पानी के सेंपल की जांच के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए। यह कार्ड बनाने के लिए किसान निकटतम कृषि अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं और मिट्टी व पानी की जांच के फायदों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में यह दर्शाया जाता है कि जमीन में किन पोषक तत्वों की मात्रा कम है और कौन से ऐसे तत्व है जिनकी मात्रा अधिक है। भूमि की उपजाऊ क्षमता को कैसे बढ़ाया जा सकता है। भूमि की प्रकृति के अनुरूप कौन-कौन सी फसलें ली जा सकती हैं। भूमि में फसल की पैदावार के लिए कितनी मात्रा में खाद डाला जाए। डॉ. सिंह ने कहा कि फसल की पैदावार के दौरान अधिक खाद की मात्रा डालने से फसलों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। फसल की पैदावार बढ़ने की बजाय घट जाती है। इसके अलावा किसानों पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है। किसान कार्ड में दिए गए मानकों के अनुरूप ही रसायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग करें। किसान जैविक खाद, नीम खाद, हरी खाद व केंचुआ की खादों का प्रयोग करें।
सोयल टेस्टिंग अधिकारी सुमेर सिंह ने बताया कि किसानों के खेतों से लिए गए सैंपलों की भूमि एवं जल परीक्षण प्रयोगशाला में जांच की जाती है। उसके बाद में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर किसान का नाम, पता, मोबाइल नंबर तथा सैंपल नंबर होता है। कार्ड में यह भी दर्शाया जाता है कि फसल करने के लिए मिट्टी सही है या नहीं। मिट्टी की विशेषताएं और सामान्य सिफारिशें, मिट्टी में उपलब्ध सभी पोषक तत्व, मिट्टी में किन-किन खादों का किस-किस फसल में कितना उपयोग करना चाहिए, उसकी जानकारी लिखी जाती है।