गर्मी और उमस के बीच बसों में भीड़ ने बढ़ाई परेशानी, वैन और ऑटो में भी हुई परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। रक्षाबंधन पर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने मायके जाने वाली महिलाओं को शुक्रवार को बसों की कमी और भारी भीड़ के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। बस स्टैंड पर महिलाएं घंटों तक बस का इंतजार करती नजर आईं। बस पहुंची भी तो उसमें इतनी भीड़ थी कि यात्रियों को बैठने की जगह तक नहीं मिल पा रही थी। वैन और ऑटो में भी काफी भीड़ रही।
त्योहार के चलते बसों में सामान्य दिनों की अपेक्षा यात्रियों की संख्या काफी बढ़ गई थी। सबसे ज्यादा परेशानी लंबे रूट पर जाने वाले यात्रियों को हो रही है। महिलाओं का कहना था कि बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, जो बसें मिल रही हैं, उनमें पहले से ही क्षमता से अधिक यात्री सवार होने के कारण सफर करना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती गर्मी के बीच क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने से अंदर बैठे यात्रियों को भी परेशानी हुई। बस स्टैंड के अंदर प्लेटफॉर्म पर जितनी भीड़ बसों का इंतजार करती नजर आई, लगभग उतनी ही भीड़ बस स्टैंड के बाहर सड़क किनारे भी दिखाई दी। बसों में जगह नहीं मिलने के कारण कई यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। ऑटो और वैन के लिए भी इंतजार करना पड़ा। यात्रियों ने बताया कि निजी वाहनों में उन्हें सामान्य किराये से अधिक राशि चुकानी पड़ रही है, लेकिन त्योहार पर समय से घर पहुंचने के लिए उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है। यात्रियों ने इसे अपनी मजबूरी बताया। उनका कहना था कि यदि बसों की संख्या बढ़ाई जाती तो उन्हें अतिरिक्त किराया देकर निजी वाहनों से सफर नहीं करना पड़ता। डीआई रामवीर ने बताया कि डिपो में सामान्य दिनों में करीब 60-70 बसें संचालित होती हैं, जबकि रक्षाबंधन को देखते हुए करीब 80 बसें चलाई जा रही हैं। त्योहार पर यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए स्टाफ की छुट्टियां भी रद्द की गई हैं।
सीट नहीं मिली तो बस की छत पर बैठकर रवाना हुए यात्री
त्योहार पर घर जाने की जल्दबाजी और बसों में सीट नहीं मिलने के कारण कुछ पुरुष यात्री जान जोखिम में डालकर बस की छत पर बैठकर सफर करते नजर आए। बस के अंदर जगह नहीं मिलने पर यात्रियों ने छत को ही सहारा बना लिया। इस तरह सफर करना कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। इसके बावजूद त्योहार पर घर पहुंचने की मजबूरी में लोग जोखिम उठाते दिखाई दिए।
लोगों से बातचीत
भाई को राखी बांधने मायके जा रही हूं। एक घंटे से बस का इंतजार कर रही हूं। बस आई भी तो उसमें बैठने की जगह नहीं मिली। -मिथलेश
हर बस पहले से ही खचाखच भरी हुई है। मजबूरी में खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। गर्मी और उमस में बहुत परेशानी हो रही है। -कलावती
सीट तो दूर बस में चढ़ना भी मुश्किल हो गया है। बसें लेट आ रही हैं, जिससे काफी देर हो रही है। लगता है आज समय से नहीं पहुंच पाऊंगी। -सुुनिता
बच्चे के साथ सफर कर रही हूं। कई बसें छोड़नी पड़ीं क्योंकि उनमें जगह नहीं थी। त्योहार पर समय से मायके पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन बसों की कमी से परेशानी बढ़ गई है। -रेखा