नाक कटा नकटी हो आई, चेहरा लहू लुहान किया, बता तो बहना सूर्पणखा किसने तेरा यह हाल किया। सूर्पणखा के नाक काटे जाने के मंचन ने दर्शकों की जमकर तालियां बटोरी। आदर्श रामलीला कमेटी के संयोजन में जवाहर नगर कैंप स्थित सनातन धर्म मंदिर में हो रही रामलीला में शुक्रवार रात्रि को दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिली। मंच पर सूर्पणखा की नाक कटना, खर-दूषण का वध और गुस्से में आए रावण द्वारा सीता का हरण करने की सोच के साथ मारीच के पास जाने के प्रसंगों का मंचन किया गया।
भगवान श्रीराम पिता की आज्ञा के बाद 14 वर्ष के लिए वन में रहने के वचन को पूरा करने के मकसद से श्रीराम-लक्ष्मण-सीता वनों में पंचवटी नामक स्थान पर रहने के लिए पहुंच जाते हैं। 13 वर्ष का वनवास का अर्सा पूरा हो चुका था। इसी दौरान सूर्पणखा उनकी जिंदगी में तूफान बन कर आती है। सूर्पणखा श्रीराम के सुंदर चेहरे पर मोहित होकर उनसे विवाह करने की जिद करने लगती है, जिसपर श्रीराम उसे लक्ष्मण के पास भेज देते है।
कुछ वाद-विवाद के बाद लक्ष्मण को गुस्सा आ जाता है और वे अपनी बरछी से सूर्पणखा की नाक काट देते हैं। चीखती-चिल्लाती सूर्पणखा कटी नाक लेकर अपने भाई खर व दूषण के पास पहुंचती है। बहन की बात सुनकर खर व दूषण श्रीराम व लक्ष्मण से लड़ाई करने पहुंच जाते हैं। इस युद्ध के दौरान खर-दूषण मारे जाते हैं। बाद में सूर्पणखा अपने भाई लंकापति रावण के दरबार में पहुंच कर अपना दुखड़ा सुनाती है और खर-दूषण की मौत का समाचार भी देती है। इस बात का बदला लेने के लिए लंकापति रावण माता सीता के अपहरण की योजना बनाता है।
क्योंकि सूर्पणखा सीता की सुंदरता का बखान भी लंकापति के सामने करती है। लंकापति रावण इसमें अपने मामा मारीच के पास जाता है और उसे सोने का मृग बनने को राजी कर लेता है। रविवार को हनुमान जी द्वारा लंका दहन व अंगद-रावण संवाद का मंचन होगा।