एक तरफ सरकार लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए रेनीवेल परियोजना का आरंभ कर रही है, तो वहीं जिले के कई स्कूलों में बच्चों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है।
बच्चों को पानी पीने के लिए आसपास के घरों या संस्थाओं में जाना पड़ता है। होडल में तो यह हाल है कि एक प्राइमरी स्कूल के बच्चों को पानी पीने के लिए पास में ही स्थित पुलिस थाने में जाना पड़ता है। वहां भी बच्चों को पीने का पानी नसीब नहीं होता है। पानी के लिए बच्चों को रोड पर भटकना पड़ता है। इससे दुर्घटना होने का भी खतरा बना रहता है। इतना सब होने के बाद भी यह समस्या न तो स्कूल के शिक्षकों व मुखिया को दिखाई देती है और न ही शिक्षा विभाग को।
होडल स्थित प्राइमरी स्कूल नंबर चार में बच्चों के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। जो पानी हैंडपंपों के माध्यम से आता है, वह इतना खारा है कि उसे इंसान तो क्या जानवर भी नहीं पी सकते।
शिक्षा विभाग व सरकार द्वारा लोगों को खासकर स्कूली बच्चों को स्वच्छ व मीठा पानी उपलब्ध कराने के दावे तो बहुत किए परंतु हकीकत कोसों दूर है। गर्मियों में इस स्कूल में पीने के पानी की किल्लत और भी बढ़ जाती है।
बच्चों को पीने का पानी नसीब नहीं होता। जिसके कारण वे मजबूरी में सड़क पार कर कभी थाने में तो कभी किसी की दुकान पर रखे मटकों में पानी खोजते घूमते हैं। मंगलवार को तो इन बच्चों को थाने में भी पानी पीने को नसीब नहीं हुआ। वहां से उन्हें प्यासा ही वापस लौटना पड़ा।