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धरनास्थल पर सरदार अजीत सिंह की जयंती मनाई

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पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर दोबारा शुरू हुए धरने के 23वें दिन पगड़ी संभाल दिवस के रूप में सरदार अजीत सिंह की जयंती मनाई। अजीत सिंह ने 1907 में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन चलाया था। मंगलवार को यूपी के छाता से आए किसानों ने समर्थन दिया। धरने में आंदोलन की आगामी रूपरेखा तैयार की गई। 27 व 28 फरवरी को चौपई प्रतियोगिता को लेकर भी गांवों में निमंत्रण देने को लेकर चर्चा की गई। धरने की अध्यक्षता छाता से आए शिव सिंह ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया।
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धरनास्थल पर सभा का शुभारंभ शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित करके किया गया। इस अवसर पर मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1907 में किसान विरोधी कृषि कानून बनाए थे, जिसके खिलाफ सरदार अजीत सिंह पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन चलाया था।
उन्होंने किसानों को जागरूक किया कि अपनी कीमत पहचानों और अपनी इज्जत को गिरने मत दो। सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ो। उन्हीं के प्रयासों से ब्रिटिश सरकार को किसान विरोध कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती ने कहा कि किसान पहली बार जातिवाद और सांप्रदायिकता से ऊपर उठकर आर्थिक शोषण के खिलाफ एकजुट हुए हैं। धरने को सोहनपाल चौहान, डॉ. रघुवीर सिंह, भागीरथ, डिगंबर सिंह, देवरतन सरपंच, ब्रह्म सिंह, बीरसिंह दलाल, हरि नंबरदार, वीर सिंह रावत, कुलभान कुमार, भागीरथ बेनीवाल, विशंबर छाता, समंदर चौहान, रुपचंद दलाल, ठाकुर लाल आर्य सहित अन्य ने संबोधित किया।
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बढ़ती कीमतों के विरोध में 26 को प्रदर्शन
तेल, गैस व आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के विरोध में अखिल भारतीय किसान सभा 26 फरवरी को उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन करेगी। जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा ने बताया कि आंदोलन की सफलता के लिए गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट के बावजूद पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिसके कारण गरीब व आम जनता की कमर टूट चुकी है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खेती में लागत बढ़ रही है तथा रसोई गैस के दाम बढ़ने से घर का पूरा बजट बिगड़ चुका है। कोरोना महामारी में जनता को राहत पहुंचाने की बजाय सरकार जनता को परेशान कर रही है।
चौपई के जरिये सरकार पर किए कटाक्ष
मंगलवार को किसानों ने चौपई व गीतों के माध्यम से सरकार पर कटाक्ष करते हुए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। महाशय रणजीत सिंह मीतरोल, सतबीर सिंह औरंगाबाद, रोशन लाल अल्लीका, धन्नीराम अलावलपुर, चंद्रमुनि धतीर, इंद्र सिंह रावत, जयदेव मीतरोल, हरप्रसाद औरंगाबाद, पोहप सिंह स्यारौली व लक्ष्मण सिंह ने गीत प्रस्तुत किए।
चौपई प्रतियोगिता के लिए दिए निमंत्रण
धरना स्थल पर आगामी 27 व 28 फरवरी को आयोजित चौपई प्रतियोगिता को लेकर गांवों में निमंत्रण दिए गए। इसके अलावा धरनास्थल पर बड़ा बैनर लगाया गया, ताकि राजमार्ग से आने-जाने वाले लोगों को चौपई प्रतियोगिता के बारे में जानकारी मिल सके। बैनर में दर्शाया गया कि चौपई व तुक प्रतियोगिता के लिए लोग 26 फरवरी तो नामांकन करवा सकती है। इसके अलावा विजेता पार्टी को उचित इनाम भी दिया जाएगा।
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