धान की फसल की कटाई शुरू हो चुकी है व इसी के साथ ही कई लोग फसल के अवशेषों को खेत में ही जला देते हैं, लेकिन ऐसा करने वालों को अब जेल की हवा खानी पड़ सकती है तथा आर्थिक जुर्माना तो भरना ही पड़ेगा। किसानों को इसके लिए जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ने दो मोबाइल वैन चलाई हैं तथा सोशल मीडिया पर भी प्रचार किया जा रहा है।
कृषि उपनिदेशक पवन शर्मा के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ भूमि से कम पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि पर पांच हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि पर पंद्रह हजार रुपये का जुर्माना तय किया है। इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा कार्रवाई करने पर छह महीने की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि धान के अवशेष जलाने से भूमि की उर्वरक शक्ति कम हो जाती है और मित्र कीट मर जाते हैं। इसके अलावा वायु प्रदूषण बढ़ता है और पर्यावरण प्रदूषित होता है जिसके चलते हमारे स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है। उन्होंने बताया कि धान के अवशेष जलाने की बजाय किसान खेत में सिंचाई करें और यूरिया डाल दें। ऐसा करने से परौली दस पंद्रह दिनों में गल जाएगी और खाद का काम करेगी।
उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा दो मोबाइल वैन चलाई गई हैं, जो जिले के किसानों को फसल अवशेष न जलाने को जागरूक करेंगी। इसके अलावा किसानों को जागरूक करने के लिए व्हाट्स ऐप ग्रुप के जरिये मेसेज भेजे जाएंगे। पंच, सरपंचों व पटवारियों का भी सहयोग लिया जाएगा। जिन गांवों में धान के अवशेष नहीं जलाए जाएंगे, उन ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा और विशेष अनुदान भी दिया जाएगा।