अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहा वक्फ बोर्ड का इंजीनियरिंग कॉलेज
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मेवात में तकनीकी शिक्षा का बड़ा केंद्र बनने की उम्मीदों के साथ स्थापित वक्फ बोर्ड इंजीनियरिंग कॉलेज, पल्ला आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। कॉलेज में प्रोफेसर और स्टाफ को पिछले करीब पांच माह से वेतन नहीं मिलने, विद्यार्थियों के हॉस्टल की जर्जर हालत, शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव ने संस्थान के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉलेज के प्रोफेसरों और स्टाफ ने बैठक कर अपनी समस्याएं सामने रखीं तो संस्थान की बदहाल स्थिति का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मेवात के विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा का यह संस्थान लगातार समस्याओं से जूझ रहा है तो वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और एडमिनिस्ट्रेटर चौधरी जाकिर हुसैन तथा बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी इसकी सुध क्यों नहीं ले रहे हैं? लंबे समय तक वेतन नहीं मिलने से शिक्षक व कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
जर्जर हॉस्टल, कई ब्लॉक बंद
कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के रहने के लिए बनाए गए हॉस्टल की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली बताई जा रही है। हॉस्टल की कई इमारतें जर्जर हो चुकी हैं और सुरक्षा की दृष्टि से कुछ ब्लॉक बंद किए जाने की बात सामने आई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के बावजूद यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है। कॉलेज में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की कक्षाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है। फिलहाल गेस्ट फैकल्टी के सहारे शिक्षण व्यवस्था चलाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन बताया जा रहा है कि अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए गेस्ट फैकल्टी की स्वीकृति तक स्पष्ट नहीं है।
कॉलेज की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रभावी कमेटी नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया है। कर्मचारियों का कहना है कि संस्थान की समस्याओं को समय पर सुनने और उनका समाधान कराने के लिए कोई मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है।
कोट
हमने इस बारे में कई बार पत्राचार किया है, लेकिन वक्फ बोर्ड के प्रशासक व अधिकारियों की तरफ से उन्हें कोई भी आश्वासन व समाधान नहीं मिला। वेतन के अलावा हॉस्टल फैकेल्टी स्टाफ की कमी जैसे कई गंभीर मसले हैं। पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारी व राजनीतिक लोगों को आगे आना चाहिए।
- डॉ. शाहीन वरिष्ठ प्रवक्ता, मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज