फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Palwal News: आकेडा के लोग प्यास बुझाने में खर्च कर रहे लाखों

विज्ञापन
विज्ञापन
हर महीने 22.5 लाख रुपये पानी के लिए खर्च कर रहे ग्रामीण, पांच साल बाद भी नलों में नहीं पहुंचा जल
विज्ञापन




संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। देश आज अमृतकाल और विकास की नई इबारत लिखने की बात कर रहा है, लेकिन नूंह जिले का आकेडा गांव आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहा है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव में रहने वाले हजारों लोगों की सुबह नल खोलने से नहीं, बल्कि पानी के टैंकर का इंतजार करने से होती है। गांव के 1,700 घरों में से करीब 1,500 परिवारों ने अपने घरों में पानी का कुंड बनवा रखा है, क्योंकि उन्हें पता है कि नलों से पानी आने की उम्मीद करना बेकार है।

ग्रामीणों ने बुधवार को गांव में आयोजित परिचर्चा के दौरान बताया कि एक टैंकर का पानी भरवाने में करीब 1500 रुपये खर्च होते हैं, जो मुश्किल से एक महीने तक चल पाता है। इस हिसाब से गांव के लोग हर महीने करीब 22.50 लाख रुपये केवल पानी खरीदने पर खर्च कर रहे हैं। सालभर में यह राशि करीब 2 करोड़ 70 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। यह रकम किसी बड़े सरकारी विकास कार्य के बजट जैसी है, लेकिन यहां यह पैसा सिर्फ प्यास बुझाने के लिए खर्च हो रहा है।
विज्ञापन


पांच साल पहले जगी थी उम्मीद, आज भी अधूरी है योजना
ग्रामीणों का कहना है कि करीब पांच साल पहले जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की योजना शुरू हुई थी, लेकिन समय बीतता गया और योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। आज भी गांव के तीनों मोहल्ले मिजलावत, बामड़ावत और सेहरावत पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्या बताई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि जल जीवन मिशन के अधूरे कार्य को जल्द पूरा किया जाए।
कोट
पानी नहीं, अपनी मजबूरी खरीद रहे हैं। हर महीने हजारों खर्च करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। -दाऊद
सरकार ने नल से जल का सपना दिखाया था, लेकिन पांच साल बाद भी नलों में एक बूंद पानी नहीं आया। -मुबीन
महंगाई के इस दौर में पानी खरीदना सबसे बड़ी चिंता बन गया है। गरीब परिवार सबसे ज्यादा परेशान हैं। -मोहम्मद अकरम
हमें भाषण नहीं, पानी चाहिए। प्रशासन गांव की समस्या को गंभीरता से लेकर स्थायी समाधान करे। -रिजवान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें