बड़कली चौक पर फैली अव्यवस्था और बदहाल व्यवस्थाओं के कारण बिना बरसात के जमा पानी।
बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली झेल रहा बड़कली चौक
रोहित
नगीना। मेवात की राजनीतिक राजधानी के रूप में पहचान रखने वाला बड़कली चौक आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली का शिकार बना हुआ है। रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही वाले इस महत्वपूर्ण चौक पर प्रशासनिक उपेक्षा साफ दिखाई देती है। वर्षों से विकास के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
सर्व जातीय सेवा समिति के उपाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजत जैन ने चौक की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यहां एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि चौक पर सुरक्षा व्यवस्था भी नाकाफी है। सीसीटीवी कैमरों और पर्याप्त स्ट्रीट लाइटों के अभाव में रात के समय अंधेरा छाया रहता है, जिससे असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है। पूर्व में यहां लूटपाट और बदसलूकी जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए बस क्यू शेल्टर तक उपलब्ध नहीं है। लोगों को बैठने के लिए उचित स्थान नहीं मिलता और पीने के पानी की कोई व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में यात्रियों को मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है।
अतिक्रमण से यातायाता व्यवस्था प्रभावित
बड़कली चौक की सड़कों की स्थिति भी बेहद खराब है। जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं और अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित रहती है। करीब दो दशक पहले चौक पर लगाई गई ट्रैफिक लाइटें आज पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। इससे वाहनों की आवाजाही अव्यवस्थित बनी रहती है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। चुनावों के दौरान नेता विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही बड़कली चौक की समस्याओं को भुला दिया जाता है। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से चौक की मूलभूत समस्याओं के समाधान की मांग की।