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Palwal News: चांदहट, गुरवाड़ी, घोड़ी और प्रहलादपुर गांवों में यमुना का जलस्तर बढ़ने से धान-गन्ने की फसल बर्बाद

Mon, 08 Sep 2025 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
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पलवल। यमुना से सटे चांदहट, गुरवाड़ी, घोड़ी और प्रहलादपुर गांवों में बाढ़ ने किसानों की जिंदगी उलट दी है। हजारों एकड़ धान और गन्ने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। खेतों में 12 फीट तक पानी जमा है और कई घर भी डूब चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में भारी गुस्सा है।
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स्थानीय किसानों गजराज सरपंच घोड़ी, श्रवण, बीरसिंह, नेपाल चांदहट, रमेश, पन्नालाल और जोगेंद्र प्रधान ने बताया कि जिन खेतों में किसानों ने साल भर की मेहनत लगाई थी, वहां अब सिर्फ पानी दिखाई दे रहा है। धान की पूरी फसल खत्म हो गई और गन्ना भी चौपट हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि फसल बर्बाद होने से अब अगली बिजाई तक संभव नहीं है।


भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर कहा कि हरियाणा इस मानसून की सबसे बड़ी आपदा झेल रहा है लेकिन सरकार किसानों की गिरदावरी तक शुरू नहीं कर रही। उनका कहना है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सरकार ने सब कुछ पोर्टल पर छोड़ दिया है। हकीकत यह है कि 90 प्रतिशत किसानों को मुआवजा नहीं मिलता और जो मिलता है वह कई महीनों की देरी से पहुंचता है।
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फसलों की बिजाई भी खतरे में

रतन सिंह ने कहा कि मौजूदा फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो गई है और अगली फसल की बिजाई भी खतरे में है। ऐसे में किसानों पर रोटी-कपड़ा-मकान का संकट गहराता जा रहा है। स्थिति ऐसी है कि कई किसान आत्महत्या तक की सोचने को मजबूर हो रहे हैं। किसानों ने साफ कहा कि धान की नष्ट हुई फसल का कम से कम 50,000 प्रति एकड़ और गन्ने का एक लाख प्रति एकड़ मुआवजा तय किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस बार भी सिर्फ पोर्टल की औपचारिकता निभाई तो वे आंदोलन की राह पकड़ेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो राहत सामग्री पहुंचाई गई और न ही पानी की निकासी के इंतजाम हुए। चांदहट, गुरवाड़ी, घोड़ी और प्रहलादपुर जैसे गांवों में हजारों लोग रोजाना संकट झेल रहे हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी ने स्थिति और भी गंभीर बना दी है।
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