पलवल। नूंह हिंसा के बाद पलवल में हुआ उपद्रव तो अब शांत हो गया है, लेकिन लोगों के मन में भय का माहौल अभी भी बना हुआ है। हलका सा किसी और चीज का शोर होने पर लोगों के भय के कारण रोंगटे खडे़ हो जाते हैं। लोग इधर-उधर देखने लग जाते हैं। यह हाल तो तब है, जब पुलिस टीमें बाजारों में लगातार गश्त कर रही हैं तथा सभी बाजारों के मुख्य द्वार पर पुलिस की टुकड़ियां बैठी हुई हैं। वहीं गली-मोहल्लों में भी लोगों के मन में भय बना हुआ है।
उपद्रव के बीच दो दिन बाद खुले बाजारों में फिलहाल केवल शहर में रहने वाले चंद ही ग्राहक पहुंच रहे हैं तथा जरूरत का सामान ले रहे हैं। जबकि गांवों से आने वाले ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहे हैं। गांवों से भी वे ग्राहक सुबह ही आकर खरीदारी कर निकल जाते हैं, जिन्होंने गांवों में छोटी-मोटी दुकानें खोली हुई हैं। यही कारण रहा कि शनिवार को भी बाजारों में रौनक नजर नहीं आई। व्यापारी बाजारों में ग्राहक न आने का कारण इंटरनेट सेवा का बंद होना भी मान रहे हैं। उनका मानना है कि इंंटरनेट सेवाएं बंंद होने के कारण गांंवों में लोगों तक यह जानकारी नहीं पहुंच पा रही हैं कि बाजार खुल गए हैं।
अपने-अपने तरीके से लोगों तक बाजार खुलने की पहुंचा रहे जानकारी
व्यापारी बाजार खुलने के दो दिन बाद भी ग्राहकों के न पहुंचने पर अब फोन के माध्यम से तथा बाजार में आ रहे कुछ ग्राहकों के माध्यम से लोगों तक बाजार खुलने की सूचना भिजवा रहे हैँ। व्यापारी राम कुमार व सत्येंद्र ने बताया कि बाजारों से ग्राहक पूरी तरह से गायब है। दुकानें खोले दो दिन हो गए हैं, लेकिन धंधा बिल्कुल नहीं है। अब उनके यहां आने वाले नियमित ग्राहकों को फोन पर दुकानें खुलने की सूचना दे रहे हैं।