पलवल। नरेगा घोटाले के मामले में चंडीगढ़ से आई विशेष टीम की जांच दूसरे दिन भी जारी रही। टीम ने गांवों में जाकर मजदूरों से बातचीत की और गांवों में कराए गए विकास कार्यों का जायजा लिया। गांव रहराना में ग्रामीणों ने बताया कि गांव में दो दिन जेसीबी से खुदाई करवा कर मिट्टी सामुदायिक केन्द्र में डलवाई। चार से पांच लाख रुपये का काम हुआ होगा। अधिकारियों ने फर्जी जॉब कार्ड बनवा कर 49 लाख रुपये सरकारी खजाने से निकाल लिए। 70 से 80 साल की उम्र के लोगों के जॉब कार्ड बनाए गए। ग्रामीणों ने एक वीडियो भी टीम को दिखाई। टीम ने गांव ताराका, हुडीथल और रनसीका का में भी फर्जीवाड़े की जांच की। गांव रनसीका में कागजों में 64 लाख 10 हजार रुपये का काम दर्शाया गया है। गांव वालों की जबानी फर्जीवाड़े की बात सुनकर जांच टीम के सदस्य एक दूसरे की देखते रहे। योजना में पिछले 10 सालों से काम कर स्वेच्छा से इस्तीफा देने वाले खंड सम्न्वयक गर्दन नीची कर लोगों की बात सुनते रहे। टीम के सदस्य गांव वालों के सवालों पर चुप्पी साधे रहे। ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच और ठेकेदार ने अपने परिवार और संबंधियों के जाबकार्ड बनाकर फर्जीवाड़ा किया है। सीईओ जिला परिषद प्रशांत कुमार ने जांच टीम 60 गांवों की लिस्ट दी। जिसमें कहा गया कि 66 गांवों की जांच के दौरान रिकॉर्ड अनुसार काम नहीं हुए। फर्जीवाड़े पर पूछे गए सवालों पर टीम के सदस्य चुप्पी साधे रहे। स्वेच्छा से इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों का जांच टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना गांव वालों को अखरता रहा। राकेश कुमार और सपात खान ने कहा है कि फर्जीवाड़े के आरोपी ही जांच टीम के साथ घूम रहे हैं। पचास करोड़ रुपये मनरेगा के जरिये सरकारी खजाने से निकालने वालों के साथ लेकर जांच निष्पक्ष हो पाएगी इस पर भी संदेह है। एडीसी उत्तम सिंह ने कहा है कि मनरेगा कार्यों को जांच करेंगे। सीईओ प्रशांत कुमार ने कहा है कि जिला के 66 गांवों में जांच के दौरान मनरेगा के कार्य नहीं पाए गए।