पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर किसानों का धरना जारी रहा। बुधवार को भी किसान संघर्ष समिति द्वारा गठित कमेटियों ने गांवों में जागरूकता अभियान जारी रखा। इस दौरान बृहस्पतिवार को धरनास्थल पर आयोजित होने वाले कोरोना टीकाकरण शिविर के संबंध में तैयारियां की गई। राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले सात साल में एक भी फैसला किसानों के हित में नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि सरकार हठ, दुराग्रह और अहंकार का परित्याग कर किसान नेताओं से वार्ता करे। तीनों जनविरोधी काले कानूनों को निरस्त करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का कानून बनाए। 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, किसानों के कर्ज माफ करने तथा 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने की घोषणा की थी, लेकिन सत्तासीन होने के बाद सरकार ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया। पूंजीपतियों का 3,73,000 करोड़ रुपये का कर्जा माफ कर दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम कम होने के बावजूद डीजल और पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ाए गए, जिससे फसलों की लागत मूल्य में बढ़ोत्तरी हुई। फसलों पर मिलने वाले बोनस बंद कर दिए गए। किसानों की दोगुनी आमदनी तो नहीं हुई, लेकिन खेती पर खर्चा बढ़ गया। उन्होंने कहा कि सच्चे किसान और झूठी सरकार के मध्य जारी आंदोलन आर्थिक आजादी की दूसरी लड़ाई है। किसानों को सड़क पर बैठने का शौक नहीं है, उन्हें सरकार ने आंदोलन करने के लिए मजबूर किया है। धरने को किसान नेता रतन सिंह सौरोत, किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा, मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, राजकुमार ओलिहान, रूपराम तेवतिया, अच्छेलाल जोधपुर, राजेंद्र घर्रोट, दरियाब सिंह, सोहनपाल, ताराचंद, चंद्रमुनि, रोशनलाल अल्लीका सहित अन्य ने संबोधित किया।