दो अक्टूबर को सोनिया गांधी के आने से लोगों में जिस प्रोजेक्ट को
लेकर उम्मीदें बंधी थीं, उसे सरकार ने नॉट फिजिबल की श्रेणी में डाल दिया।
ऐसे में इस सड़क के निर्माण के आसार कम लगते हैं। अमर उजाला को इससे
संबंधित दस्तावेज मिले हैं जो यह पुष्ट करते हैं कि इस प्रोजेक्ट को रद कर
दिया गया है।
उक्त दस्तावेज के मुताबिक, सड़क निर्माण को लेकर 22 मार्च 2013 को
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई
थी। इसमें इस परियोजना को यूजलेस बताया गया। जबकि सरकार इस प्रोजेक्ट को
लेकर सकारात्मक रुख रखती है।
दूसरी तरफ 2 मई13 को फाइनेंस डिपार्टमेंट ने
एक पत्र जारी कर इस प्रोजेक्ट को ही रद कर दिया। उल्लेखनीय है कि एक जून 2011 को मेवात के गांव मांडीखेड़ा से राष्ट्रीय
स्तर पर शिशु जननी सुरक्षा योजना की शुरुआत करने आईं यूपीए चेयरपर्सन
सोनिया गांधी के दिलचस्पी दिखाने पर मुख्यमंत्री हुड्डा ने नगीना से तिजारा
तक फोर लेन सड़क के निर्माण का ऐलान किया था।
इसके बाद सवा दो साल में
इसको लेकर चार बार सर्वे भी किराए गए। इसके बाद सड़क निर्माण को लेकर कई
प्रपोजल भी तैयार कराए गए।
इसके बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इलाके के ग्रामीणों का कहना है कि इस पौने पांच किलोमीटर लंबी सड़क के
निर्माण से उन्हें भारी राहत पहुंचेगी।
अभी तिजारा पहुंचने के लिए लंबा चक्कर और अधिक पैसा लगाना पड़ता है। पूर्व
पार्षद नसीम अहमद, सद्दीक गौरवाल, इलियास प्रधान, सबीला जंग आदि का कहना है
कि नगीना-तिजारा रोड बनाने की मांग तीन दशक पुरानी है। इसलिए सोनिया के
मेवात आने पर उनके साथ यह मांग उठाई गई थी जिसे उन्हाेंने मंजूर कर ली थी।
अब सरकार इस पर अमल करने को तैयार नहीं, जबकि अगले महीने एक बार फिर सोनिया
गांधी मेवात आ रही हैं।