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नंदीशाला योजना फाइलों में ही सिमटी

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नंदीशाला योजना फाइलों में ही सिमटी
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पलवल (अनूप पाराशर)। गांवों और शहर में सड़कों पर भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकते तथा कई बार लोगों के लिए खतरा बने सांड़ के संरक्षण के लिए दो साल पहले बनाई गई पलवल में नंदीशालाएं खोलने की योजना फाइलों में सिमटकर रह गई है। एक बार योजना बनाने के बाद न तो सरकार ने कोई संज्ञान लिया और न ही जिला प्रशासन ने इस योजना को सिरे चढ़ाने के कोई प्रयास किए, जबकि कुुछ ग्राम पंचायतों ने तो अपने गांवों में पंचायती भूमि पर नंदीशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भी भिजवा दिया, लेकिन वह फाइल आज तक चंडीगढ़ मुख्यालय पर ही अटकी हुई है। योजना सिरे न चढ़ पाने के कारण आज भी सड़कों पर घूमते सांड़ लोगों के लिए दुर्घटनाओं का कारण बने हुए हैं। इतना ही नहीं गोवंशों के संरक्षण के दावे भी पूरी तरह से जिले में फेल हो रहे हैं।
फुलवाड़ी ग्राम पंचायत ने दिया था नंदीशाला बनाने का प्रस्ताव
पलवल जिले के गांव फुलवाड़ी की ग्राम पंचायत द्वारा गांव में 15 एकड़ जमीन पर नंदीशाला बनाने का प्रस्ताव प्रशासन को भेज दिया था। प्रस्ताव पास करने के बाद ग्राम पंचायत ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी को सौंप दिया था। विकास पंचायत विभाग ने भी उस प्रस्ताव को यहां तत्कालीन उपायुक्त डॉ. मनीराम शर्मा से पास कराने के बाद सरकार के पास चंडीगढ़ मुख्यालय भिजवा दिया था, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ है। इसी तरह से गांव दीघोट, भिडूकी, सौंदहद द्वारा भी नंदीशाला बनाने के लिए जिला प्रशासन को अपने गांवों में ग्राम पंचायत की जमीन देने की स्वीकृति दे दी थी, लेकिन योजना सिरे नहीं चढ़ पाने से कहीं भी नंदीशाला नहीं खोली जा सकी।
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जैसे ही हमें सरकार की योजना की जानकारी मिली, हमारे द्वारा ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पारित कर प्रशासन को सौंप दिया, लेकिन प्रशासन व सरकार की उदासीनता के कारण आज तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। फुलवाड़ी में नंदीशाला बनाने का आज भी मेरा सपना है। इससे लोगों को सांड़ों से निजात मिलेगी। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। ग्राम पंचायत ने 15 एकड़ जमीन भी नंदीशाला को देने के लिए प्रस्ताव पारित कर दिया है।
-सुंदर पोसवाल, सरपंच गांव फुलवाड़ी
ग्राम पंचायतों के माध्यम से नंदीशालाएं खोलने की योजना बनी थी, लेकिन कुछ ग्राम पंचायतों को छोड़कर पंचायतों ने इस पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया। जिसके कारण योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। ग्राम पंचायतों को इसके लिए आगे आना चाहिए तथा गांवों में नंदीशालाएं खुलवानी चाहिए। इससे सड़कों पर घूमते सांड़ों को आसरा मिलेगा और उनके भोजन आदि की व्यवस्था होगी।
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-भानीराम मंगला, पूर्व चेयरमैन हरियाणा गोसेवा आयोग
मैं इस बारे में उपायुक्त से बात करूंगा तथा मुख्यमंत्री से भी मिलकर इस योजना को सिरे चढ़वाने का प्रयास करूंगा। अपने स्तर पर भी इसके लिए प्रयास करूंगा, ताकि सड़कों पर सांड़ न घूमे और दुर्घटनाएं कम हों। गोवंश को संरक्षण देने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी होगी। गौशाला संचालकों से भी नंदियों को गोशालाओं में रखने के लिए बात कर इस योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
-दीपक मंगला, विधायक पलवल
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