सर्दी के साथ कोटला-अकेड़ा झील में लौटे प्रवासी पक्षी
5 हजार से अधिक एकड़ में फैली झील की रखवाली सिर्फ दो चौकीदारों के भरोसे
वन्य जीव विभाग की लापरवाही उजागर, जागरूकता के अभाव में लोग समझते हैं देसी जलमुर्गी
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावड़ू। सर्दियों के आगमन के साथ ही नूंह जिले की प्रसिद्ध कोटला-अकेड़ा झील में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है, लेकिन इसके साथ ही इन पक्षियों के अवैध शिकार का सिलसिला भी फिर तेज हो गया है। करीब 5 हजार से अधिक एकड़ में फैली इस विशाल झील की सुरक्षा व्यवस्था वन्य जीव विभाग की घोर लापरवाही को उजागर कर रही है, जहां मात्र दो चौकीदारों के भरोसे पूरी झील छोड़ी हुई है। बृहस्पतिवार को झील पर बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी तैरते हुए देखे गए, लेकिन झील के किनारे शिकारियों द्वारा लगाए गए जाल भी मिले। स्थानीय लोगों ने बताया कि शिकारी रात के अंधेरे में जाल लगाते हैं और सुबह-सुबह उनमें फंसे पक्षियों को निकालकर आसपास के गांवों और बाजारों में बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जागरूकता के अभाव में ज्यादातर लोग इन दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को देसी जलमुर्गी समझते हैं।
पिछले साल भी इस झील में प्रवासी पक्षियों के शिकार का मामला सुर्खियों में आया था। तब वन्य जीव विभाग की टीम ने तीन-चार दिन की कड़ी मशक्कत के बाद जाल हटाए थे और मुकदमा भी दर्ज किया गया था। विभाग ने दावा किया था कि निगरानी बढ़ाई जाएगी, जागरूकता के लिए पोस्टर लगाए जाएंगे, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ।
चौकीदारों पर होगी कार्रवाई
इस संबंध में वन्य जीव विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रविंद्र जांगड़ा ने कहा कि इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि चौकीदारों की ओर से लापरवाही बरती जा रही है तो उन पर भी कार्रवाई होगी। यदि किसी ने अवैध रूप से शिकार के लिए जाल लगाए हैं तो पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई कराई जाएगी। वहीं, पुलिस अधीक्षक डॉ अर्पित जैन ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा और बचाव को लेकर अपील की है।
वन्य जीव और पर्यावरण प्रेमी गुरुग्राम निवासी वैशाली राणा ने भी इस पर दुख और चिंता जताते हुए कहा कि मेवात की कोटला आकेड़ा झील के बचाव के लिए हुए लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। मामला एनजीटी में भी चल रहा है।