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Palwal News: सामाजिक बुराइयों को खत्म भाईचारा कायम रखना पालों का मुख्य काम

Wed, 16 Aug 2023 11:19 PM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
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- सैकड़ों वर्षों से सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने का काम कर रहीं पाल व खाप
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। हथीन के पोंडरी गांव में हुई हिंदू महापंचायत से खुद को अलग रखकर चर्चा में आई पाल बिरादरी हमेशा से ही सांप्रदायिक सौहार्द और भाई चारे के लिए प्रयासरत रही है। जब भी किसी तरह से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास हुआ तो पाल बिरादरी के लोगों ने स्पष्ट फैसला लेते हुए अमन चैन कायम रखने में अहम भूमिका निभाई। सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े फैसले लेना पालों व खापों की मुख्य पहचान रही है। बड़े सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन आज भी पालों को साथ लेकर ही किया जाता है।
वर्षों पुराना ये संगठन आज भी समाज में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। भारत के सम्राट हर्षवर्धन व उनके दामाद गुजरात के राजा ध्रुवसेन द्वारा सर्वप्रथम सर्व खाप पंचायत संगठन बनाया गया। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित गांव सोरम में संगठन का गठन हुआ था। इतिहास के जानकार व पूर्व शिक्षक मास्टर महेंद्र चौहान ने बताया कि ग्रामीण आंचल में आज भी पाल व खाप का अलग महत्व है। एक पाल में पांच से 100 गांव तक शामिल रहते हैं। इसी प्रकार एक खाप में 100 से लेकर 360 गांवों को शामिल किया जा सकता है। 360 से ऊपर शामिल गांवों को धार कहा जाता है।
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सामाजिक कुप्रथाओं को दूर करती हैं पाल
पाल के दौरान आने वाले गांवों में बसने वाले सभी जाति व धर्मों के लोगों में सामाजिक सामाजिक सौहार्द बनाए रखा पालों का मुख्य काम है। इसके अलावा दहेज प्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को दूर करने के लिए पाल काम करती है। विवाह से लेकर मृत्यु, सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में पाल संगठित होकर कार्य करती हैं। समाज के भलाई के लिए पालों द्वारा समय-समय पर सरकार से मांगें भी की जाती हैं। बड़े-बड़े मामले जो न्यायालय पर भी नहीं सुलझते उन्हें सुलझाने का काम भी पालों व खापों द्वारा किया जाता है। उन्होंने बताया कि समाज का राजनीतिकरण होने के कारण आज पाल व खापों का महत्व कुछ कम जरूर हुआ है। राजनीति में बैठे लोग समाज के खराब कर रहे हैं, परंतु आज भी विपदा होने पर पूरा समाज एक हो जाता है।
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52 पाल में चार राज्यों के गांव शामिल
दक्षिण हरियाणा सक्रिय 52 पालों में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के गांव शामिल हैं। आगरा से लेकर दिल्ली, अलवर से लेकर अलीगढ़, भरतपुर से लेकर मेरठ, फरुखनगर से लेकर भिवाड़ी व मेवात तक के गांव 52 पाल में शामिल है। 52 गांव में हिंदुओं की 38 व मेवों की 14 पाल शामिल हैं। दोनों समुदाय सदियों से एक-दूसरे के आयोजनों में शामिल होकर सामाजिक सौहार्द का परिचय देते रहते हैं। जिले के अंदर मुख्य रूप से सौरोत, रंगीला, चौहान, तेवतिया, रावत, सहरावत, डागर, भूडेर व मलिक पाल आती हैं।
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