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Palwal News: पुलिस सुरक्षा के बीच हुई हिंदू संगठनों की महापंचायत

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कैप्शन16- हिंदू महापंचायत में हुए निर्णय सुनाते 52 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार। - संवाद
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कैप्शन17- महापंचायत में सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने पहुंचे पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह। - संवाद
कैप्शन18- महापंचायत में उमड़ी लोगों की भीड़। - संवाद
कैप्शन19- महापंचायत शुरू होने से पूर्व हुक्के पर चर्चा करते बुजुर्ग। - संवाद
कैप्शन20- सुरक्षा के मद्देनजर चौराहों पर तैनात पुलिस बल। - संवाद
कैप्शन21- यातायात को व्यवस्थित करने को लेकर बाइक सवारों को रोकती पुलिस। - संवाद


पुलिस सुरक्षा के बीच हुई हिंदू संगठनों की महापंचायत
हिंसा में मारे गए हिंदुओं के परिजनों को एक करोड़ रुपया व सरकारी नौकरी देने की मांग
मेवात मुख्यालय को तोड़कर उसमें शामिल उपमंडलों को दूसरे जिलों के साथ जोड़ने की मांग
हिंसा की जांच एनआईए से कराने तथा मेव आर्मी को आतंकी संगठन घोषित करने की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन, पलवल। नूंह में जलाभिषेक यात्रा के दौरान 31 जुलाई को हुई हिंसा के विरोध में रविवार को पलवल व नूंह सीमा पर स्थित गांव पौंडरी-नौरंगाबाद में हिंदू महापंचायत का आयोजन किया गया। भारी पुलिस बल के बीच महापंचायत में प्रशासन द्वारा दी गई 500 लोगों की अनुमति से तीन गुना अधिक लोग पहुंचे। भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारों से महापंचायत का पांंडाल गूंज उठा। अध्यक्षता 52 पालों के चौधरी अरुण जेलदार ने की। हालांकि कुछ पालों के अलावा किसान संगठनों ने महापंचायत से दूरी बनाकर रखी। महापंचायत में हिंसा के दौरान मारे गए हिंदुओं के परिजनों को एक करोड़ रुपये तथा सरकारी नौकरी देने की मांग के अलावा मेवात मुख्यालय को तोड़कर उसमें शामिल उपमंडलों को दूसरे जिलों के साथ जोड़ने की मांग की गई।
बता दें कि 31 जुलाई को बजरंग दल व विहिप द्वारा नूंह में जलाभिषेक यात्रा निकाली गई। यात्रा के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पथराव तथा गोलीबारी करनी शुरू कर दी। जिसके बाद वहां हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में कुछ लोगों की मौत हो गई, जबकि काफी संख्या में लोग घायल हो गए। हिंसा इतनी अधिक बढ़ गई कि मेवात के आसपास के जिलों में भी उपद्रव शुरू हो गए तथा आगजनी व पथराव शुरू हो गया। जिसके बाद मेवात, गुुरुग्राम, रेवाड़ी, फरीदाबाद तथा पलवल में धारा 144 लगा दी गई और बाजारों को बंद करा दिया गया। इस हिंसा के विरोध में हिंदू संगठनों ने रविवार को नूंह में महापंचायत करने का निर्णय लिया, लेकिन वहां धारा 144 होने तथा उपद्रव की आशंका को देखते हुए महापंचायत के लिए मंजूरी नहीं दी। जिसके बाद हिंदू संगठनों ने पलवल जिले में हथीन उपमंडल के गांव पौंडरी-नौरंगाबाद में महापंचायत रख दी। रविवार को हुई इस महापंचायत के लिए जिला प्रशासन ने शनिवार देर शाम तक अनुमति नहीं दी तथा बाद में हिंदू संगठनों के दबाव को देखते हुए 500 लोगों के पंचायत में शामिल होने की अनुमति दी। प्रशासन की अनुमति के बाद रविवार सुबह 10 बजे पंचायत शुरू की गई।
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महापंचायत के दौरान गो रक्षक दल के आचार्य आजादी शास्त्री ने कहा कि यह करो या मरो की हालत है। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं से बंदूक उठाने की भी अपील की है। शास्त्री ने कहा कि हमें जल्द से जल्द मेवात में 100 हथियारों का लाइसेंस सुनिश्चित करवाना चाहिए। इसमें गन नहीं बल्कि राइफल होनी चाहिए। यह एक करो या मरो की स्थिति है। देश का बंटवारा हिंदू और मुसलमान के आधार पर हुआ था। गांधी की वजह से मुस्लिम मेवात में रह गए। महापंचायत सर्व हिंदू समाज की तरफ से आयोजित की गई। इस अवसर पर मुख्य रूप से सोहना के विधायक संजय सिंह तथा पूर्व विधायक सुभाष चौधरी ने भी महापंचायत को संबोधित किया।
महापंचायत में ये लिए गए निर्णय
महापंचायत में निर्णय लिया गया कि हिंसा में मारे गए हिंदुओं के परिजनों को एक करोड़ रुपये तथा सरकारी नौकरी और घायलों को 50-50 लाख रुपये दिए जाएं। इसके अलावा मेवात व आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले हिंदुओं के हथियार लाइसेंस बनाए जाएं। मेवात मुुख्यालय को तोड़ा जाए तथा उसमें शामिल सभी उपमंडलों को दूसरे जिलों से जोड़ा जाए। हिंसा की जांच एनआईए से कराई जाए। नूंह हिंसा के बाद अन्य जिलों में हुए उपद्रव में हिंदुओं पर दर्ज किए मुकदमों को रद्द किया जाए। मेव आर्मी को आतंकी संगठन घोषित किया जाए। अवैध हथियारों के खिलाफ मेवात में सर्च ऑपरेशन चलाया जाए। हत्या के मामले में शामिल जावेद अहमद को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। रोहिंग्याओं को मेवात व हरियाणा ही नहीं पूरे देश से बाहर किया जाए। एनआरसी को जल्द से जल्द लागू किया जाए। 28 अगस्त को जलाभिषेक यात्रा को पूरा किया जाए। इन सभी मांगों को लेकर हिंदू संगठनों द्वारा गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलने का निर्णय लिया गया।
चप्पे-चप्पे पर तैनात थीं पुलिस टीमें
महापंचायत को देखते हुए पांडाल के साथ व आसपास के क्षेत्राें में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था। पुलिस टुकड़ी के अलावा बीएसएफ, सीआरपीएफ की टुकड़ियां भी तैनात की गई थीं। इसके अलावा सभी मुख्य चौराहों पर पुलिस नाके लगाए गए थे। जहां आने-जाने वाले वाहनों की गहनता से जांच की गई। साथ ही बाइकों पर सवार होकर आ रहे युवाओं को रोककर उनकी तलाशी ली गई। महापंंचायत में कोई लाठी-डंडा व हथियार लेकर न पहुंचे, उसके लिए विशेष रूप से जांंच की गई। पांडाल के गेट पर भी शक होने पर लोगों की खासकर युवाओं की जांच की गई। पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह महापंचायत खत्म होने तक स्वयं निगरानी रखे हुए थे तथा कई बार महापंचायत स्थल व आसपास के इलाकों में जाकर निरीक्षण किया।
महापंचायत के लिए जिला मजिस्ट्रेट नेहा सिंह द्वारा होडल के तहसीलदार संजीव नागर व नायब तहसीलदार श्रवण कुमार, बीडीपीओ बहीन परमिंद्र सिंह तथा हथीन के बीडीपीओ नरेश शर्मा नियुक्त किए गए थे। उनके साथ हथीन के डीएसपी सुरेश भड़ाना व थाना प्रभारी को पुलिस टीम के साथ नियुक्त किया गया था। यातायात व्यवस्था को लेकर बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता जगदीप सिंह के साथ यातायात पुलिस प्रभारी प्रीतम सिंह नियुक्त किए गए।
किसान संगठनों ने बनाई दूरी

किसान संगठनों ने इस महापंचायत से दूरी बनाकर रखी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि यह महापंचायत 52 पाल की नहीं थी। केवल कुछ हिंदू संगठनों की थी। क्योंकि 52 पाल में हिंदू-मुस्लिम सभी शामिल हैं। इसलिए 52 पाल की पंचायत होती तो सभी को 52 पाल की तरफ से चिट्ठी भेजकर निमंत्रण भेजा जाता। किसानों ने इस महापंचायत से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखी है। हालांकि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव रतन सिंह सौरोत अपने साथियों के साथ महापंचायत में शामिल हुए तथा उन्होंने अपना समर्थन भी दिया।
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जिला पुलिस अधीक्षक लोकेंद्र सिंह ने कहा कि महापंचायत के दौरान पूरी तरह से शांति रही, उसके लिए पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सभी मुख्य चौेराहों पर पुलिस बल तैनात किया गया तथा हथियार व लाठियां ले जाने पर रोक लगाई गई थी।
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