ग्राम पंचायत ने 22 जुलाई को केस वापस लिया था, ग्रामीणों में था रोष
पंचायत निदेशालय ने डीसी को दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश
2017 में भी जांच के आदेश, लेकिन कार्रवाई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
तावड़ू। सहसोला की करीब 500 से 600 करोड़ रुपये की शामलात देह चरांद की जमीन से जुड़े कई बिल्डरों और कंपनियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जमीन के विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। ग्रामीणों की शिकायत पर विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्यालय ने उपायुक्त को मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, सहसोला गांव की चार पट्टियों की करीब 906 कनाल जमीन चकबंदी के दौरान गांव के दस्तावेज में सभी पट्टियों की सहमति से चारागाह के लिए आरक्षित की गई थी। इसमें शर्त थी कि जमीन का स्वरूप बदला नहीं जाएगा, इसका बंटवारा नहीं होगा और यहां खड़े पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में आज भी यह जमीन बंजर कदीम दर्ज है।
1989 के बाद जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव का आरोप
पीपाका पट्टी निवासी आसिफ अली व महबूब सहित मुबीन खान, अख्तर, आसिफ, सुलेमान व अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 1989 में तत्कालीन नायब तहसीलदार ने बिल्डरों से मिलीभगत कर जमीन का नक्शा हकदारान तैयार कराया। आरोप है कि इसके बाद ग्रामीणों को गुमराह कर जमीन की रजिस्ट्रियां बिल्डरों के पक्ष में करा दी गईं।
कई कंपनियों के नाम जमीन होने का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक इसके बाद जमीन के अलग-अलग हिस्से मैसर्स एजीडीपी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, डीपीएजी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, एजीडीपी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, डीपीएजी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, डीपीएजी डवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड, अद्विका रियल टेक, कान्हा इंफ्रा बिल्ड, मैजेस्टिक हाई होम्स, ब्लेजिंग रियल टेक, पनग्रह टावर्स, युक्ता हाइट्स, ज्योत्सना एलएलपी, डीएससी-319 और डीएलएफ साउथ कोर्ट साकेत नई दिल्ली समेत कई कंपनियों के नाम हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि इन कंपनियों ने निशार निवासी नुन्हेरा के साथ मिलकर मौके पर कब्जा और निर्माण शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले एसडीएम और तहसीलदार के समक्ष शिकायतें दी थीं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव, विकास एवं पंचायत विभाग के समक्ष शिकायत की गई। इस शिकायत पर 26 सितंबर 2017 को उपायुक्त को शीघ्र जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
सरपंच पर मिलीभगत के आरोप
जमीन को बचाने के लिए तत्कालीन बीडीपीओ की ओर से 16 जुलाई 2021 को सब-डिबिजनल कोर्ट तावड़ू में सिविल वाद दायर किया गया था, जो अदालत में विचाराधीन था। ग्रामीणों के अनुसार 22 जुलाई 2026 को ग्राम पंचायत सहसोला के मौजूदा सरपंच ने पंचायत प्रस्ताव के आधार पर अदालत में बयान देकर यह केस वापस ले लिया। अदालत ने वाद को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया। वहीं, वित्तीय आयुक्त राजस्व के समक्ष अपील या रिवीजन दायर करने की अनुमति देने से भी इन्कार कर दिया गया। पंचायत की ओर से अदालत में केस वापस लिए जाने के बाद ग्रामीणों में रोष फैल गया। ग्रामीणों ने सरपंच पर बिल्डरों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए।
6 अक्तूबर को एसीएस के समक्ष पहुंची शिकायत
मामले में ग्रामीणों ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता विक्रम सिंह के माध्यम से 6 अक्तूबर को अतिरिक्त मुख्य सचिव के समक्ष दोबारा शिकायत दी। शिकायत में सहसोला की शामलात देह चरांद की जमीन को सुरक्षित कराने तथा सरपंच और संबंधित बिल्डरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई। इसी शिकायत पर अब उपायुक्त को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
वर्जन
मामले की जांच के लिए निर्देश प्राप्त हुए हैं। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। नियमानुसार जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- अखिल पिलानी, उपायुक्त