पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग के संबंध में बुधवार को भी किसानों का धरना जारी रहा। कोरोना का प्रकोप कम होते ही धरना स्थल पर किसानों की संख्या बढ़ने लगी है। धरने पर किसान चौपाई और कविताओं के जरिये कृषि कानूनों की खामियां बता रहे हैं। वहीं, बुधवार को किसानों ने गांव-गांव जाकर जनसंपर्क अभियान चलाया। इस दौरान लोगों से किसान आंदोलन में हिस्सा लेने की अपील की गई। धरने में निर्णय लिया कि किसान आंदोलन को तेज करने के लिए शोषित मजदूरों और कर्मचारियों का भी साथ लिया जाएगा।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता रूपचंद दलाल ने की, जबकि संचालन राजेंद्र घर्रोट ने किया। धरने में किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि नीति आयोग ने बयान दिया है कि किसानों को सरकार के साथ बातचीत फिर से शुरू करनी चाहिए और कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग के बजाए खामियों को दुरुस्त करवाने पर बल देना चाहिए। किसान नेता ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार से वार्ता का प्रस्ताव जरूर भेजा है, लेकिन नए कृषि कानूनों को निरस्त होने से कम पर समझौता नहीं होगा। सरकार कृषि कानूनों की खामियों पर चर्चा करने की बात करती है, जबकि 11 दौर की वार्ता में सरकार को बार-बार कृषि कानूनों में खामियां गिनवाई जा चुकी है। तथ्यों के साथ सरकार को कानूनों की कमी बताई है। इसके बावजूद सरकार की सुई उसी स्थान पर अटकी हुई है। सरकार समझौता नहीं चाहती है। सरकार को किसान और आम जनमानस के हितों से कोई मतलब नहीं है। सरकार पूंजीपतियों के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। धरने को किसान नेता रतन सिंह सौरोत, रूपराम तेवतिया, धर्मचंद घुघेरा, राजकुमार ओलिहान, इंद्रजीत कुंडू, हरवीर सिंह पंजाब, रोशनलाल अल्लीका, चंद्रमुनि धतीर, नरेंद्र गहलब, कुमरपाल, केपी सिंह बंचारी ने संबोधित किया।