शहर के जवाहर नगर कैंप में होने वाली रामलीला खुद में 100 वर्ष से भी अधिक का स्वर्णिम इतिहास संजोए है। पंजाबी बाहुल्य इस क्षेत्र में प्रति वर्ष होने वाली रामलीला के बारे में बताया जाता है कि यहां बोले जाने वाले संवाद आजादी से पहले के लिखे हुए हैं। पाकिस्तान में तत्कालीन पश्चिम पंजाब में रहते समय इन्हीं संवादों पर रामलीला का मंचन होता था, तथा देश के बंटवारे के समय लोग उन्हीं संवादों की पुस्तक को साथ ले आए थे।
आजादी के बाद से ही यहां रामलीला का मंचन होता रहा है। सनातन धर्म मंदिर में होने वाली रामलीला में एक बार रामलीला कमेटी में विवाद भी हो गया था व उस समय मंदिर के अंदर व बाहर दो रामलीलाओं का मंचन हुआ था। एक वर्ष के अपवाद को छोड़ दें तो यहां की रामलीला में महिला किरदारों की भूमिका भी पुरुष कलाकार निभाते हैं। यहां की रामलीला में अपने हुनर का जलवा दिखा चुके चालवा परिवार के सदस्य फरीदाबाद की रामलीला में भी अपने फन का लोहा मनवा रहे हैं।
रावण के किरदार को यहां हमेशा से ही सराहा जाता रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि जवाहर नगर निवासी अर्जुन देव पंडित जब रावण के किरदार में मंच पर आते थे तो लोग उनके संवादों को सुनकर दांतों तले अंगुली दबा लेते थे। कुछ ऐसा ही जलवा श्रवण चावला का रहा, जो कि रावण के किरदार में जान डाल देते थे। श्रवण आजकल फरीदाबाद की श्रद्धा रामलीला में रावण का किरदार निभा कर वाहवाही लूट रहे हैं। श्रवण के फरीदाबाद जाने के बाद रावण का किरदार अर्जुन देव पंडित के पुत्र जितेंद्र शर्मा ने निभाना शुरू किया। जितेंद्र ने भी अपने किरदार से अपने पिता की उम्र के लोगों को उनकी याद ताजा कर दी थी। लेकिन जितेंद्र का कुछ दिन पूर्व अल्पायु में ही निधन हो गया।