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Palwal News: इस तरह के केस में मौत के सिवाय कोई और सजा देना नहीं होगा न्याय

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- छह लोगों के हत्यारे नरेश धनखड़ के मामले में अदालत ने 150 पेज के फैसले में की टिप्पणी
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- अदालत ने माना दोषी नरेश धनखड़ पागल नहीं बल्कि पागलपन का नाटक कर रहा
-अदालत की टिप्पणी- पागल व्यक्ति इतनी हत्याएं करने के बाद अपने आप को छुपाने का प्रयास नहीं करता, जबकि उसने तो भागने का भी प्रयास किया
अनूप पाराशर
पलवल। एक जनवरी 2018 की रात डेढ़ घंटे में महिला सहित छह लोगों को मौत के घाट उतारने वाले नरेश धनखड़ को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के मच्ची सिंह केस का हवाला देते हुए यह सजा सुनाई। साथ ही सीआरपीसी की धारा 366 के तहत फांसी की सजा सुनाने के बाद उसकी मंजूरी के लिए उच्च न्यायालय से भी राय मांगी है। अदालत ने लिखा है कि ऐसे केस में ऐसे व्यक्ति को ऐसे केस में मौत की सजा देने के बजाय और कोई सजा देना सही निर्णय नहीं होगा। ऐसे मुलजिम का सुधरना और पुर्नवास होना नामुमकिन है। ऐसे व्यक्ति समाज को आगे और भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस मुलजिम के कारण काफी महिलाएं विधवा और बच्चे अनाथ हुए हैं। इसलिए ऐसे व्यक्ति को मौत की सजा देना जरूरी है, नहीं तो मरने वालों के बच्चे समाज से पूछेंगे कि ऐसे इंंसान को सजा क्यों नहीं दी गई और समाज में विकृत्ति पैदा होगी।
अदालत द्वारा सजा सुनाने के बाद 150 पेज के अपने निर्णय में स्पष्ट कहा है कि नरेश धनखड़ ने ये हत्याएं किसी भी पागलपन में नहीं की हैं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति बनाकर इन हत्याओं को अंजाम दिया है। अदालत द्वारा अपने फैसले में की गई टिप्पणियों में कहा गया है कि नरेश धनखड़ चिकित्सीय व कानूनी रूप से पागल साबित नहीं होता है। टिप्पणियों में अदालत ने यह भी कहा है कि यदि नरेश धनखड़ मानसिक रूप से पागल होता तो वह अपने आप को छुपाने का प्रयास नहीं करता और न ही अपने एक साथी धर्मपाल से इन हत्याओं को करने के बाद फोन कर फरीदाबाद छोड़कर आने की बात कहता। इससे साबित होता है कि नरेश धनखड़ ने पागलपन में ये हत्याएं नहीं की हैं। अदालत ने साक्ष्यों तथा 150 लोगों की गवाहों के दौरान बयान सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि नरेश धनखड़ को मानसिक परेशानी 17 साल पुरानी है और हत्याएं करने वाले दिन उसका दिमाग पूरी तरह से दुरुस्त था। हत्याओं को इस तरह से अंजाम देना यह दर्शाता है कि यदि वह पागल होता तो अलग-अलग जाकर लोगों की हत्याएंं नहीं करता, बल्कि किसी समूह में बैैठे लोगों पर हमला करता।
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अदालत में ठीक रहा है नरेश का बर्ताव:
अदालत ने फैसले में यह भी लिखा है कि नरेश धनखड़ का जेल में बरताव ठीक रहा है। हालांकि किसी भी व्यक्ति को चाहे वह पागल ही क्यों न हो, उसे किसी की हत्या करने की इजाजत नहीं देता।
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अदालत ने निर्णय में लिखा है कि नरेश धनखड़ का पागल होना इस बात पर भी झुठलाता है, क्योंकि उसने केस के दौरान बार-बार झूठ बोले तथा झूठे हवाले और झूठी दलीले पेश करता रहा। उसके द्वारा की गई ये हत्याएं उसके द्वारा सेना में घातक पलटन में रहते हुए लिए गए प्रशिक्षण का हिस्सा नजर आया है।
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