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Palwal News: मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज में 72 घंटे से भूख हड़ताल पर दो छात्र

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धरने पर बैठे छात्र - फोटो : Department
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32 दिन से आंदोलन की आग में तप रहा मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज, वक्फ बोर्ड बेपरवाह
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आज जामिया और एएमयू के विद्यार्थी भी आंदोलन में कूदेंगे

15 राज्यों के 744 विद्यार्थियों के भविष्य पर मंडराया संकट

संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। हरियाणा वक्फ बोर्ड के मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ विद्यार्थियों का आक्रोश अब बड़े आंदोलन में तब्दील होता जा रहा है। 32 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बावजूद वक्फ बोर्ड की ओर से न तो समस्याओं के समाधान की कोई ठोस पहल हुई और न ही विद्यार्थियों को ऐसा भरोसा मिल पाया, जिससे आंदोलन खत्म होने की उम्मीद बंधती। नतीजतन, दो विद्यार्थी 72 घंटे से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इनमें छात्र अरबाज शिकरावा की तबीयत बिगड़ने से हालात और गंभीर हो गए हैं। अब मंगलवार को कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ क्षेत्र के जिम्मेदार लोग तथा जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थी भी आंदोलन में शामिल होंगे। इससे कॉलेज का विरोध प्रदर्शन व्यापक रूप लेने जा रहा है।

एक तरफ विद्यार्थी अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं, दूसरी तरफ संस्थान का प्रबंधन और वक्फ बोर्ड अब तक ऐसा समाधान सामने नहीं ला सके हैं, जिससे गतिरोध टूट सके। किसी छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद भी आंदोलन का जारी रहना विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रहा है। सवाल उठता है कि जब 32 दिनों से आंदोलन चल रहा है तो वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक ऐसा कौन-सा कदम उठाया है, जिससे विद्यार्थियों को राहत मिल सके? क्या संस्थान की समस्याओं के समाधान के लिए उच्च स्तर पर कोई जवाबदेही तय की गई है?
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16 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का संकट

मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। संस्थान में हरियाणा के अलावा देश के 15 राज्यों के 744 विद्यार्थी पांच ट्रेडों में पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन स्थापना के 16 साल बाद भी भवन, हॉस्टल, फैकल्टी और कर्मचारियों के वेतन जैसी बुनियादी समस्याओं का बने रहना संस्थान के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस कॉलेज से सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य की उम्मीद जुड़ी है, वहां बुनियादी व्यवस्थाओं के लिए विद्यार्थियों को सड़क पर उतरना और भूख हड़ताल करनी पड़ रही है।

यह स्थिति केवल कॉलेज प्रबंधन की नाकामी का सवाल नहीं है, बल्कि वक्फ बोर्ड की निगरानी और संस्थान के प्रति उसकी प्राथमिकताओं को भी कठघरे में खड़ा करती है। 744 विद्यार्थियों की पढ़ाई, शैक्षणिक सत्र और भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक भविष्य को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मंगलवार को बढ़ेगा आंदोलन का दायरा

मंगलवार को जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों के आंदोलन में शामिल होने की तैयारी से वक्फ बोर्ड पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। क्षेत्र के जिम्मेदार लोगों की भागीदारी भी इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक और शैक्षणिक सवाल के रूप में सामने ला सकती है। अब वक्फ बोर्ड के उच्च अधिकारियों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी तरफ 16 साल से चली आ रही व्यवस्थागत समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना। अब देखना होगा कि बोर्ड इस गंभीर स्थिति में हस्तक्षेप कर कोई ठोस कार्ययोजना पेश करता है या विद्यार्थियों का आंदोलन और लंबा खिंचता है।
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कोट
सरकार जानबूझ कर मेवात के इंजीनियरिंग कॉलेज को बर्बाद करना चाह रही है, लेकिन छात्रों के इन बुलंद हौसलों के सामने सरकार की मंशा कामयाब नहीं हो पायेगी। हमारा पूरा समर्थन छात्रों के साथ है। सड़क से लेकर विधानसभा तक छात्रों की इस लड़ाई को हम मजबूती के साथ लड़ेंगे। - आफताब अहमद, विधायक, नूंह
छात्रों से बातचीत
हमारी मांगें जायज हैं। 32 दिन बाद भी सुनवाई नहीं हुई। भूख हड़ताल के बावजूद समाधान नहीं मिला तो आंदोलन जारी रहेगा। - अरबाज मेवाती, सिकरावा
हम अपने भविष्य और कॉलेज की बेहतरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड को जल्द हमारी सुध लेनी चाहिए। - हुजेफा, अलीगढ़
16 साल बाद भी कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इससे हमारी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो रहा है। - नाजिम, रिठौडा
हॉस्टल, फैकल्टी और भवन की समस्याओं का स्थायी समाधान चाहिए। अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। - प्रवीन इरशाद, रिठट
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