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Palwal News: सरकारी फाइलें तर, गांवों के हलक सूखे

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263 करोड़ की परियोजना पर सवाल
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2017 में 80 गांवों को हर घर नल से जल उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी रेनीवेल परियोजना
आरोप- 2023 में कागजों पर काम पूरा दिखाया
नल सूखे होने के कारण निजी टैंकरों से पानी खरीद रहे ग्रामीण, एक टैंकर का खर्च 1500 रुपये से अधिक


रिजवान खान
नूंह। घर के आंगन में नल लगा हो, लेकिन उससे पानी की एक बूंद भी न निकले तो करोड़ों की योजना का क्या फायदा? नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका व नगीना के दर्जनों गांवों में ग्रामीण आज इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं। वर्ष 2017 में करीब 80 गांवों को हर घर नल से जल उपलब्ध कराने के लिए 263 करोड़ रुपये की रेनीवेल परियोजना शुरू की गई थी। उम्मीद थी कि पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, लेकिन नौ साल बाद भी कई गांवों के घरों में नल सूखे हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट जितेंद्र कुमार सैनी व इंजीनियर नवेद खान का आरोप है कि विभाग ने साल 2023 में कागजों में काम पूरा दिखा दिया, जबकि धरातल पर आज भी जलापूर्ति आज भी अधूरी है।

पानी बन रहा आर्थिक बोझ
परियोजना के तहत महूं गांव में पहाड़ की चोटी पर 70 लाख लीटर क्षमता का पानी का टैंक बनाया गया। इससे कुछ गांवों में पानी पहुंच रहा है तो कुछ में नहीं। वहीं, माहौली, साकरस, सांठावाड़ी, सकरपुरी, नीमखेड़ा, हसनपुर, पाठखोरी और पाटन उदयपुरी सहित कई गांवों में पाइपलाइन बिछने के बावजूद जलापूर्ति नहीं होने की शिकायत है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर व्यवस्था तैयार की गई, तो उनके घरों तक पानी आखिर क्यों नहीं पहुंचा?
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नल सूखे होने के कारण ग्रामीण निजी टैंकरों से पानी खरीद रहे हैं। एक टैंकर पर 1500 रुपये से अधिक खर्च आता है, जो मुश्किल से 15 से 20 दिन चलता है। लोगों ने घरों में पानी जमा करने के लिए टैंक बनवा रखे हैं, लेकिन उन्हें भरवाने का खर्च लगातार उठाना पड़ता है। ग्रामीणों के लिए पानी अब रोजमर्रा की जरूरत के साथ आर्थिक बोझ भी बन गया है।

पाइपलाइन के लिए खोदे रास्ते, मरम्मत नहीं
पाइपलाइन बिछाने के दौरान गांवों के रास्ते तोड़े गए, लेकिन कई जगह उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। साकरस निवासी वकार के अनुसार, ग्रामीणों ने अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हुआ। आखिरकार पंचायत को अपने खर्च पर रास्ते ठीक कराने पड़े। बिलोंडा, मुंडाका और सांठावाड़ी में कुछ रास्ते अब भी क्षतिग्रस्त हैं।

शिकायतों के बाद भी राहत नहीं
ग्रामीण मौसम का आरोप है कि विभाग के टोल फ्री नंबर पर सैकड़ों शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। मुबारिक के अनुसार, सांठावाड़ी में फिरनी से नोटकी गुमट जाने वाले रास्ते पर आज तक पानी नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का दावा है कि बिलोंडा गांव के चेयरमैन बास में भी आपूर्ति नहीं हुई। साकरस पंचायत के करीब 20 प्रतिशत हिस्से में पानी पहुंचने की बात कही जा रही है, जबकि शेष 80 प्रतिशत हिस्सा इंतजार कर रहा है।

ग्रामीणों की शिकायतों ने परियोजना की प्रगति और निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग गांववार जलापूर्ति की जांच कर स्थिति सार्वजनिक करे, अधूरे काम पूरे कराए और टूटे रास्तों की मरम्मत करवाए। उनका कहना है कि अब आश्वासन नहीं, घरों के नलों में पानी चाहिए। आखिर जिस योजना का उद्देश्य गांवों की प्यास बुझाना था, उसके लाभ के लिए लोगों को इतने साल इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?
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वर्जन
रेनीवेल परियोजना के तहत लोगों तक पानी नहीं पहुंचने की जानकारी नहीं थी। जल्द ही गांवों की सूची तैयार कर जानकारी जुटाई जाएगी। समस्या मिलने पर समाधान कराया जायेगा।
- अखिल पिलानी, जिला उपायुक्त, नूंह
कोट
रास्ते तोड़कर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन मरम्मत नहीं हुई। अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।पंचायत को अपने खर्च पर रास्ते ठीक कराने पड़े। - वकार
माहौली बास में रेनीवेल परियोजना के तहत एक बूंद पानी की नहीं आई है। अधिकारियों को कई बार पानी की व्यवस्था कराने के लिए बोला गया पर समाधान नहीं हुआ। - मौसम माहोली
फिरनी से नोटकी गुमट जाने वाले रास्ते पर आज तक पानी नहीं आया। गांव के लोग अब भी जलापूर्ति शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बहुत परेशानी हो रही है। - मुबारिक
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चेयरमैन बास में रेनीवेल का पानी नहीं पहुंचा। साकरस पंचायत के बड़े हिस्से में भी जलापूर्ति नहीं है। करोड़ों खर्च होने के बाद भी लोगों को पानी खरीदना पड़ रहा है।
- साकिब
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