जिले की पशु संपदा जोहड़ों के पानी पर निर्भर है। पशु जोहड़ों का पानी ही पीते हैं और उसी से नहाते हैं। परंतु जोहड़ों के पानी के लिए गए सैंपलों में पेस्टीसाइड (कीटनाशक) की मात्रा बहुत अधिक पाई गई है।
लाल लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय ने 50 तालाबों के पानी के सैंपल जांचे हैं। इनमें तालाबों के पानी में भारी मात्रा में पेस्टीसाइड पाया गया है। गांव में बने जोहड़ों में ही अधिकतर दुधारू पशु पानी पीते हैं। कीटनाशक युक्त पानी पशुओं के शरीर में धीमे जहर की भांति काम कर रहा है।
इस कारण पशुओं का शरीर भी प्रभावित हो सकता है और पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी इस पानी के पीने से असर पड़ रहा है। इनके दूध का प्रयोग करने से मानव शरीर पर भी पेस्टीसाइस का असर आ सकता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया धीमी होती है।
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार के अनुसंधान निदेशक डॉक्टर रविंदर शर्मा ने बताया कि सभी 50 जोहड़ों में मोनोप्रोटोफॉस, क्लोरो पाइरीफॉस पेस्टीसाइड की मात्रा अधिक संख्या में पाई गई है। कई जोहड़ों में इसकी संख्या 16 प्रतिशत तक है जबकि मेलथापॉन, किलेनोफॉस और एडीफेनफॉस आदि पेस्टीसाइड भी दो प्रतिशत तक पाया गया है। यह सभी पेस्टीसाइड पशुओं के शरीर के लिए हानिकारक हैं।