पलवल। जिले में मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करा दूसरे राज्यों से गेहूं लाकर बेचने के मामले में सरकार गंभीर हो गई है। फसल बेचने वाले जिन 250 किसानों के खाते में 50-50 लाख रुपये की राशि डाली गई है, उनके खातों के साथ-साथ सरकार ने उनकी जमीन का रिकार्ड निकलवाना शुरू कर दिया है। इस मामले में बड़े घोटाले की आशंका है। अतिरिक्त उपायुक्त सत्येंद्र दूहन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी को जांच सौंपी गई है।
इस बार गेहूं खरीद के दौरान जिले के करीब 250 किसानों द्वारा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर रजिस्ट्रेशन कराया था। उन किसानों द्वारा जो गेहूं मंडियों में बेचा गया है, उसकी कीमत 50-50 लाख रुपये थी। जो उन किसानों के खाते में सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा डाल दी गई है। एक किसान का गेहूं 50 लाख रुपये कीमत का होने पर सरकार को उन पर फर्जीवाडे़ का शक हो गया है। सरकार ने उन किसानों के अलावा जिन आढ़तियों के माध्यम से गेहूं बेचा गया है, उन की भी जांच शुरू करा दी है। साथ ही उन सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की भी जांच की जा रही है, जिनके द्वारा गेहूं बेचने के बदले में राशि खातों में डाली गई है। सरकार को अंदेशा है कि इन फर्जी किसानों के साथ मंडियों के आढ़तियों तथा सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की मिलीभगत है।
बैंक खातों को सीज कराने की तैयारी
सरकार द्वारा उन किसानों के खातों को सीज कराने की तैयारी की जा रही है, जिनके खाते में गेहूं बेचने के बदले में 50-50 लाख रुपये की राशि डाली गई है। इसके अलावा राजस्व रिकार्ड से उनकी जमीन का ब्यौरा लिया जा रहा है। साथ ही उनके पिछले रिकार्ड को भी खंगाला जा रहा है कि पहले कितनी फसल उनके द्वारा मंडियों में बेची जाती थी तथा उसकी कितनी अदायगी होती थी।
वर्जन-
इस मामले में सरकार को फर्जीवाड़ा होने का शक है। जांच कराई जा रही है। जांच अतिरिक्त उपायुक्त सत्येंद्र दूहन के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई है। जिसमें कृषि अधिकारी डॉ. महावीर सिंह व खाद्य आपूर्ति अधिकारी नरेंद्र सहरावत को शामिल किया गया है। कमेटी जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपेगी। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - नरेश नरवाल, जिला उपायुक्त पलवल