पलवल। किसान टमाटर की खेती करके खाद्यान फसल की तुलना में कई गुणा ज्यादा मुनाफा ले सकते हैं। किसान सही तकनीक से खेती कर एक बार में 120 से 150 क्विंटल टमाटर प्रति एकड़ की पैदावार ले सकते हैं। यह जानकारी गांव बेढा पट्टी में युवा संगठन द्वारा आयोजित किसान गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने किसानों को दी। उन्होंने टमाटर की उन्नत खेती व फसल में रोग नियंत्रण के बारे में भी किसानों को बताया। गोष्ठी की अध्यक्षता सब्जी उत्पादक किसान दयाराम सौरोत ने की जबकि संचालन पृथ्वी सिंह व देवेंद्र कुमार ने किया।
डॉ. मलिक ने कहा कि टमाटर एक ऐसी सदाबहार सब्जी है जिसकी पूरे वर्ष मंडियों में मांग रहती है। किसान टमाटर का ज्यादा उत्पादन लेने के लिए उन्नत किस्मों हिसार अरुण, हिसार ललित एवं हिसार ललिमा का प्रयोग करें। ज्यादा पैदावार लेने के लिए संकर किस्म भी लगा सकते हैं। संकर किस्म की पौध सब्जी उत्कृष्टता केंद्र होडल में उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि गोबर की खाद के अतिरिक्त 150 किलोग्राम सुपर फास्फेट, 30 किलोग्राम यूरिया, 35 किलोग्राम क्यूरेट पोटाश प्रति एकड़ टमाटर की बिजाई के समय तथा बाद में पौधरोपण के एक माह बाद 25 किलोग्राम यूरिया डालकर हल्की सिंचाई कर दें। टमाटर को फटने से रोकने के लिए 0.3 प्रतिशत बोरक्स का छिड़काव फल लगने के समय, 15 दिन बाद तथा तीसरा छिड़काव फल पकते समय करें। टमाटर की सिंचाई नाली विधि से 10 दिन के अंतराल में करते रहें। टमाटर पकते समय सिंचाई कम कर दें। निराई-गुड़ाई कर खरपतवार को निकाल दें। नजदीक मंडी वाले किसान लाल पके हुए टमाटर तोड़ें जबकि दूर मंडी होने पर आधे पके हुए टमाटर तोड़े ताकि वे खराब न हों।
उन्होंने बताया कि कीट ग्रसित टमाटरों को निकालकर खेत के बाहर मिट्टी में दबा दें। बिजाणु रोग प्रभावित फलों को निकालकर नष्ट कर दें। फल छेदक सुंडी की रोकथाम के लिए 20 हजार टाइकोग्राम परजीवी प्रति एकड़ फसल पर छोड़ दें। इस अवसर पर डॉ. मलिक ने किसानों को खेत में ले जाकर मित्र कीट व शत्रु कीटों की पहचान भी बताई। इस अवसर पर इंद्रपाल, परमा नंबरदार, धर्मवीर, दुलीचंद, चंदन सिंह, महेंद्र, विष्णु, चेतराम, रतिराम, सुरेश, बुधराम, सुंदर, पप्पू, सुरेंद्र, महीपाल समेत अन्य किसान मौजूद थे।