जिले में सोमवार को गोवर्धन का पर्व पारंपरिक ढंग से मनाया गया। गांवों में ही नहीं शहरों में भी पर्व पर महिलाओं ने गोबर से भगवान गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा अर्चना की।
ब्रज क्षेत्र में होने के चलते यहां गोवर्धन पूजा का खासा उत्साह रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने देवराज इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए ब्रज में गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू करा दी थी। जिससे कुपित होकर इंद्र ने भारी बरसात शुरू कर दी तो भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।
पर्व को लेकर ग्रामीण महिलाओं ने सुबह स्नान करने के बाद घर के आंगन को गोबर से लेपकर साफ -सफाई की। शाम को करीब चार बजे महिलाओं ने आंगन में गोवर्धन भगवान की आकृति बनानी शुरू की। अंधेरा होने के बाद गोवर्धन की पूजा अर्चना के बाद दीपावली की तरह दीये भी जलाए गए। जगह-जगह मंदिरों में, सामाजिक संस्थाओं व व्यक्तिगत रूप से लोगों ने कढ़ी बाजरा व चावल की खिचड़ी के भंडारे लगा कर लोगों को प्रसाद खिलाया।
वहीं दस्तकारों व मिस्त्रियों ने इसे विश्वकर्मा डे के रूप में मनाया। औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की गई तथा औजारों को भी पूजा गया।