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नहरों में पानी नहीं आने से खरीफ की फसलों पर संकट

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सोमदेव आर्य
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हथीन। हथीन उपमंडल की नहरों, रजवाहों और माइनरों में पानी नहीं आने से सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि एक सप्ताह में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो हजारों एकड़ में खड़ी खरीफ की भीषण गर्मी के चलते नष्ट हो सकती हैं। हथीन उपमंडल के अधिकांश कृषि क्षेत्र का भूमिगत जल खारा है। ऐसे में यहां कृषि क्षेत्र बरसाती पानी एवं नहरी पानी पर निर्भर है।
खरीफ फसलों में ज्वार, बाजरा, धान, मूंग, तिल, अरहर, कपास, सोयाबीन की बिजाई हो चुकी है। बरसात अभी हुई नही है। अब पानी देने का समय आ चुका है। लेकिन, खेतों में सिंचाई के लिए नहरी पानी उपलब्ध नहीं है। यदि भूमिगत खारे पानी से सिंचाई करते हैं तो उत्पादन प्रभावित होता है। यह स्थिति हथीन उपमंडल के गांव घीगडाका, स्वामीका, हथीन, मलाई बुराका, घर्रोट, जनाचोली, खोकियाका, जैनपुर, पचानका, रूपडका, उटावड़, मालूका आदि गांवों में बनी हुई है। किसानों का कहना है कि नहरी पानी अविलंब उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के दौरे पर आए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को पत्र लिखकर गुहार लगा चुके हैं। मंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात कर नहरी पानी छुड़वाने के निर्देश दिए थे। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एसपी गर्ग का कहना था कि नहरों में पानी छोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं होनी यह स्थिति बनी हुई है। शीघ्र ही पानी छोड़ा जाएगा।
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जिन किसानों ने अगेती किस्म की खरीफ की फसलों की बिजाई की है उन्हें नहरी पानी नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजरा ,ज्वार की फसलें मुरझा रही हैं। अविलंब नहरी पानी छोड़ा जाए।
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-मोहम्मद जकरिया, किसान मलाई
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नहरी पानी की मांग उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला एवं मुख्यमंत्री मनोहर लाल से की जा रही है। किसानों की समस्या के निवारण हेतु जेजेपी सक्रिय है। शीघ्र ही नहरों में पानी छुड़वाया जाएगा।
नाजिम खिल्लूका, जजपा नेता
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