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पत्नी के पिता को किया एसएमएस तलाक, तलाक, तलाक

Wed, 08 Feb 2017 04:22 PM IST
palwal
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 हथीन में मोबाइल पर तलाक देने का एक और मामला विवाद का कारण बन गया है। एक व्यक्ति ने पत्नी के पिता के मोबाइल पर एसएमएस कर तलाक दे दिया। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बुधवार को गांव जलालपुर में मुस्लिम मेव महापंचायत बुलाई गई है। इस्लामी विद्वानों एवं मुफ्तियों से भी सलाह मशविरा किया जा रहा है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से तीन तलाक के लिखे गए शब्दों से तलाक हुआ है अथवा नहीं। बता दें कि मलाई गांव के शाकिर ने कथित रूप से अपनी पत्नी के पिता के मोबाइल पर तीन तलाक का एसएमएस मैसेज भेजा। इस पर विवाद खड़ा हो गया है।
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मलाई निवासी शाकिर का निकाह नूंह जिले के नगीना थानांतर्गत गांव अटेरना की एक युवती के साथ दो वर्ष पूर्व हुआ था। इस दंपति के एक बेटी भी है। पति-पत्नी के बीच मामूली विवाद हुआ तथा पति ने कहा कि उसे वह तलाक दे देगा। इसके बाद करीब एक माह पूर्व पत्नी अपने मायके गांव अटेरना चली गई। अटेरना में पत्नी अपनी एक वर्षीय बेटी साथ रह रही थी कि अचानक पत्नी के पिता के मोबाइल पर एक एसएमएस आया जिसमें शाकिर ने अपनी पत्नी से तीन तलाक लिखकर तलाक देने का उल्लेख किया। इस मैसेज के आने के बाद पत्नी के मायके वाले अपने मिलने जुलने वाले पंचों को लेकर सोमवार को मलाई गांव पहुंच गए।

गांव के सरपंच फकरू, उनके पिता हाजी मजीद नंबरदार, लखनाका गांव के पूर्व सरपंच एवं प्रियदर्शनी आवास योजना के चेयरमेन जाकिर हुसैन, नजमू  एवं पूर्व विधायक अजमत खान को बुलाकर पंचायत कराई गई। पंचायत में फैसला लिया गया कि इस मामले में इस्लामी शरीयत के विद्वानों एवं मुफ्तियों से सलाह-मशविरा किया जाए।
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पंचायत में पति को बुलाकर उससे यह पूछा गया कि वास्तव में मोबाइल पर तलाक का एसएमएस क्या उसी ने भेजा था। इस पर पति शाकिर ने स्पष्ट कर दिया कि तलाक का एसएमएस उसने पूरे होश-हवाश के साथ भेजा था। इसके बाद दोनों पक्षों की तरफ के पंचों ने फैसला लिया कि मंगलवार को मांडीखेड़ा स्थित इस्लामी मदरसा में जाकर इस्लामी शरीयत के मुफ्तियों से राय ली जाए।


मंगलवार को पंचों का एक ग्रुप मांडीखेडा गया और वहां मुफ्तियों से राय ली। मुफ्तियों ने अभी तक इस मामले में अपनी कोई राय नहीं दी है। अब पंचों ने फैसला लिया है कि बुधवार को जलालपुर गांव में मुस्लिम मेव महापंचायत होगी जिसमें एसएमएस पर दिए गए तलाक की वैधता  तथा भविष्य के बारे में फैसला लिया जास्गा। मायके पक्ष एवं सुसराल पक्ष ने पंचों को भरोसा दिया है कि वह जो भी फैसला लेंगे उसकी पालना की जाएगी। प्रियदर्शनी आवास योजना  के हथीन ब्लॉक चेयरमैन एवं लखनाका गांव के पूर्व सरपंच जाकिर हुसैन का कहना है कि बुधवार को होने वाली महापंचायत में इस्लामी शरीयत एवं देश के कानून को देखते हुए फैसला लिया जाएगा।

गैर इस्लामिक है तीन तलाक
इस मामले में इस्लामी विद्वान डॉक्टर मोहम्मद अरसद ने बताया कि तीन तलाक गैर-इस्लामिक है। इस्लाम में तीन तलाक एक साथ देने का कोई सिस्टम नहीं है। इस्लामिक शरिया के कई स्कूल इसको नकारते भी हैं। उनका कहना है कि 20 से ज्यादा मुस्लिम देशों ने तीन तलाक को बैन कर रखा है तो हमारे देश में भी बैन होना चाहिए। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच स्टूडेंट विंग के नेशनल कनविनर खुर्शीद राजाका कहना है कि तीन तलाक को खत्म करने का आंदोलन या सुधार मुस्लिम समाज से ही उभरना चाहिए तब यह ज्यादा प्रभावशाली और स्वीकार्य होगा। उनका कहना है कि इस्लामिक लॉ में तलाक की अनुमति है। न सिर्फ पुरुष बल्कि महिला भी तलाक ले सकती हैं।

कुछ दिन पूर्व भी हुआ था ऐसा विवाद
गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व भी मोबाइल पर तलाक देने का विवाद हुआ था। जिसमें मलाई गांव का लड़का था और लड़की पक्ष अलवर का था। इस मामले में भी इस्लामी विद्वान और मुफ्तियों से राय ली गई थी। महापंचायत भी हुई थी और अंत में लड़के पक्ष को कहा गया था कि वह लड़की पक्ष को 25 लाख रुपये दे। जिसमें से 5 लाख रुपये और 6.5 लाख के जेवरात लड़के पक्ष ने पंचायत के समक्ष उसी समय दे दिए थे तथा शेष राशि 12 फरवरी तक देनी है।
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