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परिवार संग जन्मदिन मनाने का वायदा पूरा नहीं कर सके कोणार्क

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पलवल की आदर्श कॉलोनी में शव पहुंचते ही लोगों का हुजूम उमड़ गया। - फोटो : Palwal
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परिवार संग जन्मदिन मनाने का वायदा पूरा नहीं कर सके कोणार्क
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प्रवीण बैंसला
पलवल। पायलट बनने की चाहत कोणार्क शरन को जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर ले गई। थापर यूनिवर्सिटी से आईटी से बीटेक करने के बाद गुरुग्राम स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में लाखों की नौकरी मिली। लेकिन, पायलट बनने के लिए रायबरेली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में दाखिला ले लिया। इसके बाद परिजनों ने कोणार्क की शादी तय करने का मन मनाया, लेकिन उसने मना कर दिया। कोणार्क ने अपना 27वां जन्मदिन परिजनों के साथ मनाने का वायदा किया था, लेकिन उसे वह पूरा नहीं कर सके।
कोणार्क के पिता 65 वर्षीय राम शरण एयर इंडिया से रिटायर हैं। अब उन्हें खराब मौसम के कारण एयरक्राफ्ट के क्रैश होने का दुख जिंदगी भर खटकता रहेगा। कोणार्क के शव के साथ आए साथी प्रशिक्षु पायलट पार्थ और भार्गव ने बताया कि सोमवार सुबह 9:30 बजे फुरसतगंज एयरपोर्ट से चार छोटे एयरक्राफ्टों ने मऊ के लिए उड़ान भरी थी। सभी पायलटों को एक घंटे की उड़ान के बाद वापस लौटना था। तीन पायलट 10:30 बजे के आसपास वापस लौट आए थे, लेकिन कोणार्क नहीं लौटा। इसके बाद उससे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन मौसम खराब होने के कारण संपर्क नहीं हो सका। करीब 11: 34 मिनट पर एयरक्राफ्ट के क्रैश होने की सूचना मिली। कोणार्क के साथियों ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी कैप्टन संदीप पुरी की अगुआई में मामले की जांच की जा रही है।
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शव पहुंचते ही कॉलोनी में मचा हाहाकार
यूपी के आजमगढ़ में सोमवार को प्रशिक्षण विमान टीबी-20 के दुर्घटनाग्रस्त होने से पलवल निवासी प्रशिक्षु कोणार्क शरन की मौत हो गई थी। मंगलवार को कोणार्क के शव का अंतिम संस्कार रसूलपुर रोड स्थित मोक्षधाम में किया गया। इस दौरान भारी संख्या में क्षेत्र के लोग मौजूद रहे। दोपहर करीब 12:50 बजे कोणार्क का शव पलवल स्थित आदर्श कॉलोनी आवास पर पहुंचा। शव पहुंचते ही कॉलोनी में हाहाकार मच गया। लोग विलाप करते रहे। शव के अंतिम दर्शन के दौरान परिजनों और सगे संबंधियों का रो-रोकर बुरा था। मां सरोज बेटे को एक बार और देखने की दुहाई देती रही। बहन प्रतिभा, सुजाता और मीनाक्षी भी अपने लाडले भाई के चले जाने का विश्वास नहीं कर पा रही थीं।
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बुढ़ापे की लाठी को परमात्मा ने तोड़ दिया
मां सरोज ने रोते हुए कहा कि दो दिन पूर्व कोणार्क से बात हुई थी। छह माह से वह घर नहीं लौटा था। अक्तूबर में उसका जन्मदिन था। कोणार्क ने अपना 27वां जन्मदिन परिवार के साथ मनाने का वायदा किया था, लेकिन वह वायदे को पूरा नहीं कर सका। उनका तो पूरा संसार ही उजड़ गया। उनके बुढ़ापे की लाठी को परमात्मा ने तोड़ दिया। उम्र के इस पड़ाव पर उनका एकमात्र सहारा ही नहीं रहा।
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