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Palwal News: सीएम फ्लाइंग टीम ने स्कूलों में मारा छापा, रिकाॅर्ड और वास्तविकता में मिला अंतर

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बदहाल शौचालयों, जर्जर कमरों और लैब की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त रुख अपनाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। सरकारी स्कूलों में बंद और बदहाल शौचालयों, जर्जर कमरों और लैब की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। चंडीगढ़ से भेजी गई सीएम फ्लाइंग टीम ने बुधवार को सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर कागजों में दर्ज सुविधाओं और धरातल की स्थिति का मिलान किया, जिसमें बड़ा अंतर देखने को मिला।

मुख्यमंत्री, पीएसएसई और डीजी एजुकेशन के निर्देश पर पहुंची टीम ने विभागीय पोर्टल और यू-डाइस के आंकड़ों की जांच कर स्कूलों के टॉयलेट की स्थिति, वहां पानी की उपलब्धता और विद्यार्थियों के इस्तेमाल करने या नहीं करने की पड़ताल की। साथ ही स्कूल भवन, कमरों और अन्य सुविधाओं की स्थिति भी देखी गई।
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सौंख व पल्ला गांव में हुई जांच
निरीक्षण के दौरान सौंख व पल्ला गांव के स्कूल में रिकॉर्ड और धरातल के बीच बड़ा अंतर सामने आया। स्कूल के एक कमरे को मौके पर मेजर रिपेयर की जरूरत मिली, जबकि विभागीय पोर्टल पर उसकी स्थिति ठीक अथवा माइनर रिपेयर के रूप में दर्ज थी। अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। रिकॉर्ड में वास्तविक स्थिति दर्ज नहीं होने का सीधा असर मरम्मत और बजट आवंटन पर पड़ सकता है। यदि किसी भवन को मामूली मरम्मत की श्रेणी में दिखाया जाता है, जबकि उसे बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है, तो उसके अनुरूप बजट की मांग और स्वीकृति प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों ने सालाहेडी, फिरोजपुर नमक, ऐंचवाडी व शाह चोखा सहित दर्जनों गांवों के सरकारी स्कूलों के कमरों व शौचालयों की स्थिति की भी जांच करने की मांग की है।

असल तस्वीर पोर्टल पर दर्ज कराने के निर्देश
निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को स्कूलों का दोबारा निरीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति पोर्टल पर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। खंड शिक्षा अधिकारियों को मौके पर जाकर सुविधाओं की स्थिति जांचने को कहा गया है। इसका उद्देश्य स्कूलों की वास्तविक जरूरत के आधार पर मरम्मत और बजट की प्रक्रिया तय करना है।

स्कूलों में घुसने पर लगाई थी पाबंदी
कुछ दिन पहले युवाओं की ओर से सोशल मीडिया पर नूंह के सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्थाओं से संबंधित फोटो और वीडियो साझा किए गए थे। इनमें शौचालयों की खराब स्थिति समेत कई मूलभूत सुविधाओं पर सवाल उठाए गए। इसके बाद स्कूलों में जाकर व्यवस्थाओं की जांच कर सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करने को लेकर जिला स्तर पर पाबंदी का मामला भी सामने आया था। हालांकि, इसके बाद भी फोटो और वीडियो सामने आते रहे और मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया।
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वर्जन
नूंह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में बैठक की गई। इसमें स्कूल मुखियाओं को सफाई, पानी-बिजली, कमरों की बेहतर व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं। चंडीगढ़ से यू-डाइस का निरीक्षण करने के लिए आई टीम आई थी। - मामराज रावत, डीईईओ, नूंह
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