पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को भाजपा सरकार के सात साल व किसान आंदोलन के छह माह पूरा होने पर किसानों ने काला दिवस मनाया। कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेज पर चल रहे धरने में काले झंडे व पट्टियां बांधकर विरोध जताया गया। इस दौरान अटोहां चौक पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का पुतला जलाया तथा राष्ट्रपति के नाम जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। किसानों ने हाथों में काले झंडे लेकर मानव श्रृंखला बनाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने को विभिन्न राजनीतिक पार्टियों व गांवों की सरदारी ने समर्थन दिया। किसानों ने चौपाइयों के माध्यम से सरकार पर जमकर कटाक्ष किए।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में बीती दो दिसंबर से चल रहे धरने की अध्यक्षता 52 पालों के पंच अरुण जेलदार ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ किसान नेता रतन सिंह सौरोत ने किया। धरने में महात्मा बुद्ध की जयंती होने पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। धरने में विभिन्न राजनीति पार्टियों से पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता करण सिंह दलाल, इनेलो नेता महेंद्र सिंह चौहान व रानी रावत, आम आदमी पार्टी के जिला संयोजक कुलदीप कौशिक व साउथ जोन प्रभारी ओमप्रकाश गुप्ता, शशिबाला तेवतिया मुख्य रूप से मौजूद रहे।
धरने को संबोधित करते हुए करण दलाल ने कहा कि पिछले छह महीनों से जारी किसान आंदोलन ने पलवल का नाम पूरे देश में रोशन किया गया। सर्दी-गर्मी, बरसात व कोरोना महामारी जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी किसान अपने हकों के लिए मोर्चे पर डटे रहे। उन्होंने कहा कि किसानों ने घमंड में चूर मोदी सरकार को भीतरी चोट देने का काम किया है। आंदोलन की बदौलत ही विभिन्न राज्यों में भाजपा की करारी हार हुई है। किसान आंदोलन की बदौलत ही इस बार किसानों का गेहूं मंडियों में बिक पाया है। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि किसानों ने संगठित होकर सरकार को अपनी ताकत दिखाई है और मजबूत संगठन से ही सरकार झुकती है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में भी भाजपा नेता राजनीति करने में लगे हैं। आज भाजपा को झंडा लगाकर वैक्सीनेशन शिविर लगाए जा रहे हैं और सत्तापक्ष के विधायक व मंत्री शिविरों का उद्घाटन कर रहे हैं। महामारी में पूरी तरह से विफल रही सरकार वैक्सीन के जरिये अपनी लाज बचा रही है। मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि आज किसानों को असहयोग आंदोलन चलाने की जरूरत है। सत्तापक्ष के नेता व कार्यकर्ताओं पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाना चाहिए। पिछले छह माह से किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर है और सरकार ने किसानों से वार्ता तक बंद कर दी है।
धरने को किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद घुघेरा, धर्मेंद्र हिंदुस्तानी, कृष्ण ठाकुर, राजेश्वर गर्ग, यशपाल मावई, जफर मेव यदुवंशी, दिशा गौतम, राजेश रावत, इरफान खान, राजकुमार ओलिहान, राहुल तंवर, दलवीर डागर, अच्छेलाल, करतार मढनाका, सोहनपाल, राजेंद्र घर्रोट ने संबोधित किया।
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गांवों से आई सरदारी व विपक्षी दलों ने दिया समर्थन
बुधवार को धरना स्थल पर मनाए गए काले दिवस में विभिन्न गांवों से आई सरकारी व दलों ने समर्थन किया। बैसलात से कुश्क-बड़ौली, दीघोट, गहलब व छाता से आई सरदारी धरने में शामिल हुई। इसके अलावा 12 राजनीतिक पार्टियों ने भी धरने को सहयोग दिया। कांग्रेस, इनेलो, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किसानों के साथ काला दिवस मनाया। इस अवसर पर दीघोट से आई सरदारी ने आर्थिक सहयोग किया, वहीं डॉ.वीरेंद्र सिंह अलावलपुर ने 31 हजार रुपये व जेसीबी संचालक एसके शर्मा ने 11 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग किया।
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अलीगढ़ रोड़ पर भी जलाया गया पुतला
बुधवार को गांवों में काला दिवस मनाया गया। किसानों ने अपने घरों पर काले झंडे लगा। वहीं किसान नेता वीरसिंह दलाल के नेतृत्व में गांव किठवाड़ी के अड्डे पर मोदी सरकार का पुतला जलाया गया। ग्रामीणों ने हाथों में काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वीरसिंह दलाल ने कहा कि किसान पिछले छह महीने से दिल्ली बॉर्डर पर बैठे है, लेकिन सरकार मांगे मानने को तैयार नहीं है। इस मौके पर जगवीर दलाल, सुखन पहलवान, बलवीर दलाल, धर्मेंद्र दलाल, केशव रावत, दीपक दलाल, मानव दलाल, मंजीत दलाल, दिनेश रावत, कबीर दलाल, जगत दलाल, हरकेश दलाल, अश्वनी दलाल, जगवीर रावत, दलसिंह दलाल मौजूद रहे।