अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे धरने पर रविवार को काला दिवस मनाकर सरकार के प्रति रोष जताया गया। धरना स्थल पर बैठे पुरुषों व महिलाओं ने अपने सिर व बाजू पर काली पट्टी बांधकर काला दिवस मनाया। लोगों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
धरने की अध्यक्षता समिति के जिला प्रधान धर्मवीर तेवतिया ने की। तेवतिया ने बताया कि सरकार उनके साथ कोई शांतिपूर्ण तरीके से वार्ता नहीं कर रही है और न ही कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। इसको लेकर उनका धरना रविवार को 27वें दिन में प्रवेश कर गया।
उन्होंने कहा कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति का धरना किसी एक जाति का नहीं, बल्कि सभी 36 बिरादरियों का है, क्योंकि गत वर्ष आरक्षण के दौरान जिनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और जो जेलों में बंद हैं, वे जाट जाति के ही नहीं, बल्कि 36 बिरादरी के युवा हैं। इनको जेलों से निकालने व मामलों को रद्द करने की मांग संघर्ष समिति कर रही है, इसलिए धरने का जाट जाति के ही नहीं, अपितु सभी 36 बिरादरी के लोगों को सहयोग करना चाहिए। अन्य वक्ताओं ने कहा कि यह धरना तब तक चलेगा, जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानेगी। वक्ताओं का कहना था कि दो मार्च को राष्ट्रपति को ज्ञापन भी दिया जाएगा।
इस दौरान किसी भी घटना से निपटने के लिए काफी पुलिस बल गांव अलावलपुर में तैनात है। पुलिस अधिकारी ही नहीं, जिला उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा भी लगातार धरना स्थल की रिपोर्ट लेते रहे। खुफिया विभाग लगातार धरना स्थल की रिपोर्ट को सरकार तक पहुंचाने में लगा रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से देशराज चौहान, मनमोहन, किशन मंबर, विजय राठी, वेगराज, देवरतन, जयराम पहलवान, राजेंद्र लाला, धन सिंह, हृदय नंबरदार, हेतलाल पहलवान, लाल चंद, अमर सिंह, महावीर, प्यारे, शेरण, विजन, मुंशी और दीपचंद ने अपने विचार रखे।