ईश्वर नगर में सड़क, नाली व कचरा उठान की ठीक व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी, प्रशासन सिर्फ आश्वासन देने तक सीमित
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। ईश्वर नगर वार्ड नंबर-8 के निवासी कई सालों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। क्षेत्र में न तो सड़क की समुचित व्यवस्था है, न ही नाली और कचरा निस्तारण की कोई ठोस प्रणाली। स्थानीय पार्षद ने एक माह के भीतर व्यवस्था सुधारने और दो-तीन महीनों में काम पूरा करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक साल से कचरा उठाने की व्यवस्था नहीं है। चुनाव के वक्त तो कचरा वाली गाड़ी आती थी, लेकिन चुनाव के बाद कचरे की गाड़ी नहीं आती है। इस कारण लोग कचरा अपने घरों के आस-पास ही फेंकने को मजबूर हैं। इससे बदबू फैल रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। नगर परिषद की लापरवाही इस संकट का मुख्य कारण है।
सड़क और नाली की दयनीय स्थिति
इलाके में न सड़क है, न ही नाली। बारिश के मौसम में पूरे इलाके में कमर तक पानी भर जाता है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। करीब सात साल पहले इलाके में सीवर लाइन डाली गई थी, लेकिन आज तक वह अधूरी पड़ी हुई है। पानी की पाइपलाइन बिछाने की बात अब लोगों के लिए सपना बन चुकी है। प्रशासन की उदासीनता के कारण निवासियों में रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों ने कहा कि सरकार उनसे समय पर टैक्स वसूलती है, लेकिन बदले में उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। मंत्री, विधायक और पार्षद की अनदेखी ने हमलोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। कई बार शिकायत करने के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ है।
नाली नहीं होने के कारण पानी सड़कों पर और आस-पास के खाली प्लॉट में भर जाता है, जिससे गंदगी फैलती है और लोग बीमार पड़ते हैं। – देवेंद्र सिंह, निवासी
हमलोगों ने मिलकर खुद ही कच्चा रास्ता बनाया है, ताकि किसी तरह आना-जाना हो सके। वरना थोड़ी सी बारिश में ही घर से निकलना दुश्वार हो जाता है।– प्रेम कुमार, निवासी
पानी की निकासी नहीं होने से उनके घर के पास वाला प्लॉट हमेशा जलमग्न रहता है। इसी कारण उनका मकान गिर चुका है। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ रही है। –गीता रानी, निवासी
बारिश में पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। नाली के अभाव में पानी का बहाव रुक जाता है और घरों में घुस जाता है। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी होती है। –किसनी देवी