फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निजी अस्पतालों में वसूली जा रही मनमानी फीस

विज्ञापन
विज्ञापन
होडल। कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। अस्पतालों में मरीजों को बेड मिलना मुश्किल हो रहा है। वहीं शहर के कुछ निजी अस्पताल मरीजों से मनमाना बिल वसूल रहे हैं। आम मरीज के लिए ऑक्सीजन, वेंटिलेटर व अन्य सुविधाओं का खर्च तो बूते से बाहर है ही, महंगी दवाएं भी दर्द दे रही हैं।
विज्ञापन

एक पीड़ित ने बताया कि उसके पिता को सप्ताह भर पहले कोरोना हुआ था। अगले ही दिन ऑक्सीजन लेवल 75 पहुंच गया। पुन्हाना मोड़ स्थित कोविड हास्पिटल में भर्ती कराया। यहां मरीज को लाते ही डेढ़ लाख रुपये एडवांस जमा कराए गए। पांच दिन में ही दो लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। प्रतिदिन 30 हजार रुपये आईसीयू व 10 से 15 हजार रुपये दवा पर खर्च हो रहे हैैं। दवा के पक्के बिल तक नहीं दिए गए। यह सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं है, बल्कि निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे तमाम लोग महंगे इलाज से त्रस्त हैं।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज को शुरुआत में आइवरमेक्टिन, डॉक्सी, न्यूमोसल्आइड, एजीथ्रोमाइसिन या अन्य एंटीबायोटिक, विटामिन बी, सी, डी के अलावा अन्य एंटी वायरल आदि दवाएं दी जाती हैं। हल्के लक्षण वाले मरीजों का बमुश्किल 500 से 700 रुपये प्रतिदिन की दवा से इलाज हो जाता है। गंभीर मरीज की बात करें तो कुछ और दवाएं दी जा सकती हैं, जिनका खर्चा सामान्य दिनों में अधिकतम तीन से पांच हजार रुपये होता है। वहीं निजी अस्पतालों में दवा का खर्चा प्रतिदिन पांच से 15 हजार या ज्यादा बताया जा रहा है। ज्यादातर अस्पताल भर्ती मरीज के तीमारदार को अपने ही अस्पताल में खुले मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, वहां भी जमकर खेल हो रहा है। दवाओं की एमआरपी के नाम पर भी मरीजों को लूटा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि यदि अन्य खर्च के साथ दवा पर खर्च राशि की जांच कराई जाए तो अस्पतालों में बड़ी धांधली का पर्दाफाश होगा। इसके लिए सरकारी तंत्र भी बनाया गया है, मगर अभी तक जिम्मेदार लोगों ने तमाम शिकायतों के बाद भी कोई पहल नहीं की है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की भी कई गुना अधिक कीमत वसूलने के आरोप लग रहे हैं।
विज्ञापन

क्या कहते हैं अधिकारी
इस बारे में जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. ब्रह्मदीप सिंह का कहना है कि यह ऐसा दौर है, जिसमें डॉक्टरों पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। डॉक्टर मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए आगे बढ़कर काम करें। इलाज का खर्च शासन की गाइडलाइन में तय राशि से अधिक न हो। दवा व अन्य खर्च में मनमानी की शिकायत मिली तो कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें