- पुराने प्लास्टर पर ही लगाया जा रहा नया मसाला, पानी की तराई भी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिला मुख्यालय स्थित लघु सचिवालय में चल रहे मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि भवन की मरम्मत करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। पुराने और जर्जर प्लास्टर को हटाकर दोबारा निर्माण करने के बजाय उसी पर सीमेंट का मसाला चढ़ाकर काम पूरा किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती पर संदेह पैदा हो गया है।
बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य में आवश्यक तोड़फोड़ नहीं की जा रही, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार कमजोर प्लास्टर को पूरी तरह हटाकर नया प्लास्टर किया जाना चाहिए। निर्माण कार्य में पानी की तराई (क्योरिंग) भी नहीं किए जाने की शिकायत सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टर के बाद नियमित रूप से पानी की तराई करना जरूरी होता है, ताकि सीमेंट अच्छी तरह जम सके और भविष्य में प्लास्टर उखड़ने या दरारें आने की संभावना कम हो।
लघु सचिवालय में प्रतिदिन हजारों लोग विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि मरम्मत कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ तो सरकारी धन खर्च होने के बावजूद भवन की दीवारें कुछ ही समय में फिर से खराब हो सकती हैं।
स्थानीय लोग आसिफ, खलील अहमद एडवोकेट, ताहिर ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराए जाने तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित विभाग को नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ठेकेदार निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य करे और सरकारी धन का सही उपयोग हो।
कोट
अगर लापरवाही बरती जा रही है तो इसे न केवल ठीक कराया जाएगा, बल्कि कार्रवाई भी की जाएगी। मानकों से कोई समझौता नहीं है। -प्रदीप सिंधू, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी।