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Palwal News: मनमोहन की शहादत के बाद पिता न रो पा रहे न कुछ कह पा रहे

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कैप्शन: 8-शहीद मनमोहन का फाइल फोटो: संवाद
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कैप्शन: 9-मनमोहन की शहादत की सूचना मिलने के बाद उसके घर परिजनों को सांतवना देने पहुंचे गांव के लोग: संवाद
कैप्शन: 10- शहीद मनमोहन के घर के बाहर खडे़ लोग: संवाद
दो दिन पहले ही मित्र समान भाई से वीडियो कॉल पर बात की थी शहीद मनमोहन ने
आज बहीन आएगा पार्थिव शरीर
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। लद्दाख में गहरी खाई में सेना के ट्रक के गिरने से शहीद हुए बहीन गांव के मनमोहन उर्फ मोनू शर्मा की मां व पत्नी इस बात से बेखबर हैं कि मनमोहन अब नहीं रहा। मनमोहन की शहादत की सूचना मिलने पर उसके पिता बाबूराम का इतना बुरा हाल है कि वे न तो रो पा रहे हैं और न ही कुछ बता पा रहे हैं। अपने इकलौते पुत्र की मौत का गम उनकी आंखों में साफ दिखाई दे रहा है। बहीन गांव ही नहीं पूरे जिले में मनमोहन के निधन पर शोक की लहर है। लोग घर पहुंचकर उसके पिता को सांत्वना दे रहे हैं।
वर्ष 2017 में सेना में भर्ती हुए मनमोहन उर्फ मोनू शर्मा की ड्यूटी पिछले सात माह से लद्दाख में थी। जहां सेना का ट्रक मनमोहन सहित अन्य सैनिकों को लेह से नयोमा लेकर जा रहा था। जैसे ही पहाड़ियों पर चालक ने ट्रक को मोड़ा तो अनियंत्रित होकर ट्रक नीचे खाई में जा गिरा। जिससे मनमोहन सहित नौ सैनिकों की मौत हो गई। इस बात की सूचना रविवार सुबह मनमोहन के घर गांव बहीन उसके पिता बाबू राम को मिली। सूचना मिलते ही उसके पिता बाबूराम के पैरों की जमीन खिसक गई। आंखों से आंसू छलक उठे। उन्होंने इस दुर्घटना की सूचना परिवार की महिलाओं को नहीं बताई तथा अपने भाइयों व परिवार के अन्य सदस्यों को दी। जिसके बाद महिलाओं को घर के अंदर एकांत में रखा गया है, ताकि उन्हें मनमोहन की मौत की सूचना न मिले।
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शहीद मनमोहन सिंह के पिता बाबूराम जो कि होडल में घड़ी बनाने का काम करते हैं, उनका सपना सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना था, लेकिन घर की जिम्मेदारियों व अन्य कारणों से वे सेना में भर्ती नहीं हो पाए। अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए मनमोहन ने सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया। जिससे उसके पिता बेहद खुश थे। शहीद मनमोहन के चचेरे भाई सुभाष ने बताया कि मनमोहन वर्ष 2017 में सेना में भर्ती हुआ था।
दो दिन पहले ही की थी वीडियो काॅल से बात
शहीद मनमोहन के परिवार के ही सदस्य तथा मित्र जय प्रकाश ने बताया कि दो दिन पहले ही मनमोहन से उसकी वीडियो कॉल पर बात हुई थी। मनमोहन ने बातचीत में कहा था कि वह नवंबर में दिवाली पर छुट्टी आएगा, लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी आखिरी बार बात हो रही है। इतना कहते ही जय प्रकाश की आंखों से आंसू छलक उठे।
मनमोहन वालीबाॅल का अच्छा खिलाड़ी था। वालीबाॅल प्रतियोगिता के लिए उसे प्रमुख रूप से बुलाया जाता था। उसके खेल को लेकर गांव ही नहीं आसपास के इलाके के लोग उससे प्रभावित थे। बेहद सरल स्वभाव का व्यक्तित्व मनमोहन गांव के हर बडे़-बुजुर्ग की इज्जत करता था। बिना नमस्ते किए नहीं जाता था।
दो साल पहले हुई थी शादी
शहीद मनमोहन की शादी दो साल पहले चंचल के साथ हुई थी। एक साल का उसका बेटा है। अपने बेटे से बहुत प्यार करता था। अप्रैल में छुट्टी पर आने के बाद बेटे को अपने करीब रखता था। परिवार के साथ पूरा समय व्यतीत करता था। मई में ही छुट्टी खत्म करके गया था। उसकी पत्नी चंचल को किसी दुर्घटना का शक तो है, लेकिन उसे अभी इस बात का पूरा ज्ञान नहीं है कि उसका मनमोहन अब इस दुनिया में नहीं है।
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शहादत की सूचना मिलते ही बहीन गांव के सरपंच विक्रम सिंह भी शहीद के घर पहुंचे। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहादत पर उन्हें दुख है। साथ ही गर्व भी है कि एक युवा देश सेवा करते शहादत को पा गया। गांव बहीन ही नहीं आसपास के पूरे इलाके को उनके ऊपर गर्व है। गांव में शहीद के घर पहुंचने वालों का तांता लगा हुआ है। शहादत की सूचना पर उनके घर पहुंचने वालों में अशोक शर्मा, लवकुश रावत, राहुल रावत सहित समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल रहे।
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