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Palwal News: हादसों में 280 मौतें, ट्रॉमा सेंटर अब भी फाइलों में कैद

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550 से अधिक हादसों में 280 लोगों की मौत
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दो साल पहले सीएम ने की थी घोषणा, 550 से अधिक हादसों में 420 लोग घायल
गंभीर मरीजों को दिल्ली, फरीदाबाद और नूंह के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा




विपिन सैनी



पलवल।
ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है। काफी समय पहले इसकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है, लेकिन सीएम की घोषणा के दो साल बाद भी निर्माण स्थल पर एक ईंट भी नहीं लग पाई है। दूसरी ओर, जिले में हाईवे और एक्सप्रेसवे का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है और इन पर हो रहे सड़क हादसों में घायल लोगों की जान बचाने के लिए जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी अधूरी हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग-19, मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे और केएमपी एक्सप्रेसवे पर हादसों के बाद गंभीर घायलों को समय पर बेहतर उपचार मिलना बड़ी चुनौती बना हुआ है। जिला नागरिक अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को दिल्ली, फरीदाबाद और नूंह के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में उपचार में देरी घायलों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
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जनवरी से अब तक जिले में 550 से अधिक सड़क हादसे दर्ज किए जाने की जानकारी है। इनमें करीब 280 लोगों की मौत हुई और लगभग 420 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हादसों के इन आंकड़ों के बीच जिले में आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की जरूरत और भी गंभीर हो जाती है। दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे यानी गोल्डन ऑवर में इलाज मिलना महत्वपूर्ण होता है, लेकिन गंभीर मरीजों को दूसरे शहरों में ले जाने की मजबूरी उपचार की चुनौती बढ़ा देती है।

48 एकड़ जमीन दी, फिर भी निर्माण शुरू नहीं

जिले के गांव पेलक में मेडिकल कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर और क्रिटिकल केयर यूनिट बनाने की योजना है। इसके लिए ग्राम पंचायत करीब 48 एकड़ जमीन सरकार को दे चुकी है। सरपंच जगदीश प्रसाद के अनुसार, वर्ष 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मेडिकल कॉलेज की घोषणा की थी, लेकिन करीब दो साल बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि खेल राज्य मंत्री से बातचीत के दौरान फरवरी-मार्च में काम शुरू कराने का आश्वासन मिला है।

महिलाओं और बच्चों के अस्पताल का काम भी अटका

जिला नागरिक अस्पताल परिसर में गर्भवती और बच्चों के उपचार के लिए प्रस्तावित 100 बेड के अस्पताल का निर्माण भी लंबित है। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की योजना पर भी असर पड़ रहा है। जिले के अन्य अस्पताल भी मरीजों की जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।

रेफर सेंटर बनकर रह गया जिला अस्पताल

जिला नागरिक अस्पताल 200 बेड का है और यहां प्रतिदिन 1,500 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों की बड़ी संख्या के मुकाबले विशेषज्ञ उपचार और जरूरी सुविधाओं की कमी के चलते गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। कई परिवारों को बेहतर इलाज के लिए फरीदाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम के निजी अस्पतालों में अधिक खर्च करना पड़ता है। ऐसे में सवाल है कि जिले में हादसों के पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए योजनाओं को जमीन पर कब उतारा जाएगा।
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जिला अस्पताल से रेफर किए गए मरीज

जून - 78
जुलाई - 65
अगस्त - 94
सितंबर - 65
अक्तूबर - 52


अधिकारी का वर्जन



मेडिकल कॉलेज और ट्रॉमा सेंटर के निर्माण को लेकर फाइल चंडीगढ़ मुख्यालय भेजी गई है। मुख्यालय से मंजूरी मिलते ही जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ, सीएमओ, पलवल



जिला अस्पताल परिसर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र करीब 16 करोड़ से बनाया जाएगा। इसके लिए 10 से 15 दिनों के भीतर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- रितेश यादव, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, पलवल
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