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जेनरेटर तो है, पर लगाया नहीं गया, बिजली गुल होते ही रुक जाते हैं काम

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जनरेटर के बाद भी बत्ती गुल होते ही रुक जाते हैं सारे काम
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- कूड़े के ढेर के पास रखा है जनरेटर सेट को
अमर उजाला ब्यूरो
होडल। प्रदेश सरकार और प्रशासन लघु सचिवालय में सरल प्रोजेक्ट योजना के तहत लोगों को एक छत के नीचे 380 सरकारी योजनाओं का लाभ देने की योजना चलाने के लिए भले ही अधिकारियों की पीठ थपथपा रही हो, लेकिन बत्ती गुल होते ही यहां लोग एक दूसरे का मुंह ताकते रह जाते हैं। जनरेटर होने के बाद यहां के कर्मचारी खुद हो ठगा का महसूस करते हैं।
बिजली जाने पर लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इस लिए सचिवालय में लाखों रुपये खर्च कर साइलेंस जेनरेटर मंगवाया गया, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते आज वह आज तक जेनरेटर जैसे आया था, वैसे ही रखा है। यह कूड़े ढेर पर रखा हुआ है। इससे पहले भी दो जेनरेटर सैट खराब पड़े हैं और वे कंडम हो चुके हैं। ऐसे में कभी-कभी बिजली की आपूर्ति सुचारु न होने के कारण उपभोक्ताओं को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। शहर के समाजसेवी बबली परदेसी ,जयदेव गर्ग का कहना है कि कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन के अलावा तहसील सम्बंधित अन्य कार्य कराने के लिए सैकड़ों उपभोक्ता कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन जब यहां बिजली कटौती का पता चलता है तो उपभोक्ता परेशान हो जाता है। उपभोक्ता यहां घंटों तक बिजली आने के इंतजार में चक्कर काटते रहते हैं। इसके अलावा कार्यालयों में तैनात कर्मचारी भी बिजली कटौती के बारे में कुछ नहीं बोल पाते हैं। सरकार को कूड़े के ढेर में जेनरेटर को डलवाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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इस बारे में क्षेत्र के विधायक उदयभान का कहना है कि अधिकतर कार्यालयों में सभी कार्य ऑनलाइन होने और बिजली की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए जनरेटरों में सरकार डीजल भी नही डालवा सकती। सरकार जनता को क्या मुंह दिखाएगी आने वाले चुनावों में जनता अपने एक एक पल का हिसाब भाजपा सरकार से लेगी।
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