उधार दिए पैसे मांगे तो गर्भवती को पीटा, गर्भ में बच्चे की मौत
- बार-बार गुहार लगाने के बाद बावजूद पुलिस ने दर्ज नहीं किया मामला
- अदालत में इस्तगासे दायर होने के बाद हरकत में आई पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। उधार दिए रुपयों को वापस मांगना एक गर्भवती महिला को उस समय महंगा पड़ गया जब मां-बेटे ने मिलकर उस पर हमला कर दिया। आरोपियों ने महिला के पेट में घूंसे मार दिए जिससे उसके गर्भ में पल रहे दो महीने के बच्चे की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही तब सामने आई जब शिकायत के बावजूद पुलिस ने लगभग साढे़ 5 महीने तक आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया और पीड़िता न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाती रही। उसने थक-हारकर न्याय के लिए अदालत में इस्तगासा दायर की। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और अदालत इस्तगासा पर आरोपी मां-बेटे के खिलाफ मामला दर्ज किया।
जांच अधिकारी एएसआई इंद्रजीत के अनुसार पलवल के इस्लामाबाद निवासी गीता ने अदालत में दायर इस्तगासा में कहा है कि तीन-चार साल पूर्व पड़ोस में रहने वाली जगवती ने उससे 40 हजार रुपये छह महीने के लिए उधार लिए थे और वापस नहीं लौटाए। पीड़िता ने कई बार तगादा किया लेकिन जगवती टालमटोल करती रही। गत 30 मार्च 2018 को पीड़िता जब अपने रुपये मांगने जगवती के पास गई तो उसने अपने बेटे गौरव को बुला लिया और पीड़िता के साथ मारपीट की। गौरव ने पीड़िता के पेट में घूंसे मारे। उस समय पीड़िता दो महीने की गर्भवती थी। पेट में घूंसे लगने से उसकी तबीयत खराब हो गई। पीड़िता मामले की शिकायत लेकर महिला थाने पहुंची। महिला थाना में पीड़िता से कहा गया कि मामला मारपीट का है इसलिए नजदीक थाने में शिकायत दें। उसके बाद पीड़िता शिकायत लेकर कैंप थाना क्षेत्र के अंतर्गत किठवाडी रेलवे ओवरब्रिज की नीचे स्थित चौकी पहुंची जहां उससे कहा गया कि पहले वह अपना मेडिकल कराए।
31 मार्च को पीड़िता के अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को देख महिला चिकित्सा अधिकारी ने पाया कि उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी है। यह जानने के बाद पीड़िता ने कई बार पुलिस थाने में जाकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर आरोपी लगातार उसे जान से मारने की धमकी देते रहे। अदालत से मिली इस्तगासा के आधार पर पुलिस ने 20 सितंबर को आरोपी जगवती व उसके पुत्र गौरव के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।