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हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल 14 वें दिन भी जारी

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रोडवेज के अस्थायी चालकों ने भी हाथ खड़े करना शुरू कर दिया
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पलवल। हरियाणा रोडवेज की हड़ताल का असर अब जनमानस पर पड़ने लगा है। लोगों को यातायात सुविधाएं मिलने में परेशानी हो रही है। यह पहला बार है जब हरियाणा रोडवेज की हड़ताल इतनी लंबी चली है और आगे भी हड़ताल खत्म होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। सोमवार को अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने भी 30 व 31 अक्तूबर को अपने-अपने विभागों की हड़ताल करने की घोषणा कर दी है। रोडवेज की हड़ताल से पलवल में ही परिवहन निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये का घाटा हो रहा है। एक ओर सरकार कर्मचारियों की बात नहीं सुन रही है तो वहीं कर्मचारी भी सरकार के फैसले के खिलाफ खड़े हैं।
हड़ताल के कारण सरकार द्वारा परिवहन निगम में लगाए गए अस्थायी तौर पर चालक व परिचालकों ने भी अब हाथ उठाने शुरू कर दिए हैं। जितने चालक व परिचालक ड्यूटी पर रखे गए थे, अब उनमें से आधे भी बसों को नहीं चला रहे हैं। इस कारण आधी से ज्यादा बसें बस अड्डा में खड़ी नजर आती हैं। लोग भी अस्थायी चालकों के भरोसे चल रही रोडवेज की बसों में बैठने से कतरा रहे हैं। उधर जिले में निलंबित किए गए 15 चालक व परिचालकों के मामले में भी कर्मचारियों में रोष ज्यादा उत्पन्न हो गया है।
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रोडवेज कर्मचारियों द्वारा की जा रही हड़ताल में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, हरियाणा कर्मचारी महासंघ, हरियाणा कर्मचारी संयुक्त संघ, शिक्षा विभाग तालमेल कमेटी के रोहतक में लिए गए सांझे निर्णय के बाद सोमवार को दो दिन की हड़ताल करने की घोषणा की गई। सीआईटीयू से संबंधित सभी जनसंगठनों आंगनबाड़ी, आशा वर्कर, मिड-डे मील, ग्रामीण चौकीदार, ग्रामीण सफाई कर्मचारी, भवन निर्माण मजदूर भी कर्मचारियों ने भी इस हड़ताल में शामिल होने की घोषणा कर दी है। डिपो प्रधान गंगराम ने बताया कि प्रदेश सरकार धन के अभाव का बहाना करके रोडवेज बेडे़ में 720 बसों को किराए पर शामिल करके केवल बड़े ट्रांसपोर्टरों के हितों को साधने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ रोडवेज में घाटे की बात कह रही है। दूसरी तरफ सरकार अपनी हठधर्मिता के कारण रोडवेज की हड़ताल को लंबा करके विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा रही है।

वहीं दैनिक यात्री मनोज व कालेज के छात्र आकाश का कहना है कि रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते उन्हें यात्रा में काफी परेशानी हो रही है। प्रतिदिन वह अपने गंतव्य तक देरी से पहुंच रहे हैं। उधर कालेजों में पढ़ने वाली छात्राओं व महिलाओं ने भी सोमवार को रोडवेज के प्रबंधक से मिलकर उनके लिए बस सुचारु रूप से चलाने की मांग की। छात्रा राखी, महिमा, सुनैना, प्रीति का कहना था कि वह निजी बसों व अवैध वाहनों में सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। उनका ध्यान रख उनके लिए बस सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
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पलवल डिपो के महाप्रबंधक लाजपत राय ने बताया कि उनके डिपो में कुल 98 बसें हैं। उन बसों के चलने से प्रतिदिन लगभग पांच लाख रुपये की आय होती थी। अब डिपो से 50 बसों को चलाया जा रहा है। इससे अब आय ढाई लाख रुपये हो गई है। हालांकि पूरे प्रयास किए जा रहे हैं कि यात्रियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इसके लिए 50 बसों को नए चालकों, आरटीओ कार्यालय से मिले चालक व पुलिस कर्मियों द्वारा चलाया जा रहा है।
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