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78 गज जमीन के 150 मालिक

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पलवल। मुंबई-दादरी फ्रेट कॉरिडोर के लिए अधिगृहीत की गई जमीन के मामले में बड़ा घोटाला सामने आया है। रेलवे द्वारा अधिगृहीत जमीन मात्र 78 गज जमीन के 150 लोग मालिक बन कर रेलवे से मुआवजा व नौकरी मांग रहे हैं। इस बात का खुलासा होने पर रेलवे द्वारा मुख्यमंत्री मनोहर लाल से शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। सीएम विजीलेंस टीम ने सबसे पहले पलवल एसडीएम कार्यालय को सील कर दिया है। वहीं एसडीएम कंवरपाल 24 मार्च तक की छुट्टी पर चले गए हैं। अतिरिक्त उपायुक्त सत्येंद्र दूहन की निगरानी में पलवल एसडीएम कार्यालय में जांच शुरू कर गई है।
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मुंबई-दादरी फ्रेट कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के दादरी से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान, गुजरात होते हुए महाराष्ट्र के नवी मुंबई तक जाएगा। यह ग्रेटर नोएडा से तुगलकाबाद होते हुए पृथला, सोहना, रेवाड़ी, नारनौल होते हुए राजस्थान में प्रवेश करेगा। इसके लिए ही रेलवे द्वारा जमीन अधिगृहीत की गई थी। रेलवे मंत्रालय जिस व्यक्ति की जमीन का अधिग्रहण करता है, उसे मुआवजे के साथ-साथ रोजगार के लिए प्रति व्यक्ति पांच से साढ़े पांच लाख रुपये की अतिरिक्त राशि देता है। वहीं राशि नहीं देने पर परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी दी जाती है। रेलवे मंत्रालय की इस योजना की जानकारी जब राजस्व विभाग के कर्मचारियों को मिली, तो उन्होंने जमीन खरीदनी शुरू कर दी और मात्र 78 गज जमीन में ही 150 लोग मालिक बन बैठे।
ऐसे बने 78 गज में 150 लोग मालिक
रेलवे ने रिटायर्ड पटवारियों और तहसीलदारों से अधिगृहीत की गई जमीन की जांच करवाई थी। इस दौरान गांव पृथला निवासी मांगेराम से अधिग्रहण प्रारूप तैयार करने वाले कर्मचारियों ने जमीन खरीदने की योजना बनाकर एक पटवारी ने जमीन खरीदी और 70-70 हजार रुपये लेकर 140 से अधिक लोगों के नाम इसमें शामिल कर लिए। इसके लिए सुरेश नामक व्यक्ति ने 6 गज जमीन को 80 हजार रुपये में खरीदा और इसे 30 से अधिक लोगों को बेच दिया। इसी प्रकार साल 2018 में 12 गज जमीन को एक लाख 45 हजार रुपये खरीदा और 40 से अधिक लोगों को इसमें हिस्सेदार बना दिया गया। वहीं साल 2019 में 30-30 गज जमीन दो बार खरीदी गई और इसमें करीब 80 लोगों को शामिल कर दिया गया। यह जमीन डेढ़-डेढ़ लाख रुपये में खरीदी गई। इस जमीन का नवंबर 2020 में एसडीएम ने अवार्ड घोषित कर दिया। अवार्ड घोषित होने के साथ ही मुआवजा राशि लेने के साथ ही 140 लोगों ने 5-5 लाख रुपये के लिए भी आवेदन किया। आवेदन जब रेल मुख्यालय पहुंचा तो अधिकारी छोटी सी जमीन के 150 मालिक देख चौंक गए। उन्होंने जिला उपायुक्त से मामले की जांच करने को कहा, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर रेलवे के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला लाया।
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अंडरग्राउंड होने लगे सभी मालिक
जांच की बात सामने आते ही मालिकाना हक जता रहे सभी लोग धीरे-धीरे अंडरग्राउंड होने लगे हैं। वहीं बताया जा रहा है कि पलवल के अलावा फरीदाबाद व गुरुग्राम में भी इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। रेलवे द्वारा अब उन जिलों में भी जांच कराई जा रही है, जहां की जमीन कॉरिडोर के लिए अधिगृहीत की गई है।
वर्जन-
मामले की जांच सीएम विजिलेंस टीम द्वारा की जा रही है। जल्द ही जांच रिपोर्ट आ जाएगी। इसमें जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में है। कोई भी दोषी इस मामले में बच नहीं पाएगा। - सत्येंद्र दूहन, अतिरिक्त उपायुक्त पलवल
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