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रोडवेज की बसों का चक्का जाम, सात लाख के राजस्व का हुआ नुकसान

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रोडवेज की बसों का चक्का जाम, सात लाख के राजस्व का हुआ नुकसान
-कर्मचारियों ने सरकार पर लगाए शोषण के आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल संशोधित बिल 2017 को वापिस लेने तथा निजी बसों को हायर करने के विरोध में मंगलवार को हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने जाम रखकर हड़ताल की। जाम के दौरान कर्मचारियों ने बस अड्डा परिसर में धरना भी दिया तथा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। चक्का जाम व धरना रोडवेज कर्मचारी संघर्ष समिति के नेता बिजेंद्र रावत व गंगाराम की अध्यक्षता में किया गया। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल व चक्का जाम का समर्थन सर्व कर्मचारी व कर्मचारी महासंघ द्वारा भी किया गया। रोडवेज की बसों के चक्का जाम की घोषणा के चलते सुबह से ही भारी पुलिस बल बस अड्डा परिसर पर तैनात था, ताकि किसी तरह का कोई विवाद न हो।
नहीं चलने दी गई एक भी बस
रोडवेज कर्मचारियों ने पलवल डिपो से चलने वाली एक भी बस को नहीं चलने दिया गया। चक्का जाम को लेकर रोडवेज कर्मचारी नेता सुबह तड़के तीन बजे ही बस अड्डा परिसर में जमा हो गए तथा सुबह तीन बजे से चलने वाली बसों का चक्का जाम करा दिया। जिले के अंदर सभी रोडवेज की बसों को बस अड्डा परिसर में ही खड़ी करवा दिया गया। उसके बाद कर्मचारी परिसर के अंदर ही जमीन पर दरियां बिछाकर धरने पर बैठ गए।
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सात लाख का हुआ नुकसान
पलवल बस डिपो पर रोडवेज कर्मचारियों द्वारा किए गए चक्का जाम और हड़ताल से निगम को सात लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह नुकसान केवल पलवल डिपो के तहत चलने वाली बसों के चक्का जाम होने से है। उसके अलावा होडल व अन्य डिपो से चलने वाली बसों का नुकसान अलग है।

यात्री रहे खासे परेशान
हरियाणा रोडवेज की बसों के चक्का जाम के चलते पलवल बस अड्डा चौक व परिसर से फरीदाबाद, दिल्ली, मथुरा, कोसी, होडल, अलीगढ़, जेवर, नूंह, गुरूग्राम की तरफ जाने वाले दैनिक यात्रियों को खासी परेशानी रही। खासकर जिले के स्थानीय रूटों पर चलने वाले यात्रियों को बेहद परेशानी उठानी पड़ी तथा जान जोखिम में डालकर तिपहियों व अवैध वाहनों का सहारा लेना पड़ा। रोडवेज के चक्का जाम के कारण मंगलवार को डग्गामार वाहनाें ने खूब मनमानी की।
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सरकार पर कर्मचारियों ने लगाए आरोप
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार पर जमकर आरोप लगाए। कर्मचारी नेताओं का कहना था कि सरकार हरियाणा परिवहन निगम को बंद कराना चाहती है तथा निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। ऐसा रोडवेज कर्मचारी होने नहीं देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन ला वाहन चालकों के समझाया खड़ी करना चाहती है, जो वे होने नहीं देंगे। सरकार ने आज तक कर्मचारियों के हित की एक भी मांग को पूरा नहीं किया है। कर्मचारियों का शोषण हो रहा है तथा निजीकरण के नाम पर उन्हें बरबाद करने का प्रयास किया जा रहा है। धरने को कर्मचारी नेता रमेश चंद, बनवारी लाल, जिले सिंह भड़ाना, श्रीपाल भाटी, हरिचंद वर्मा, राजेश शर्मा, धर्मवीर सिंह, राज सिंह सौरोत, जितेंद्र डागर, हुकम, लालचंद, राजवीर शर्मा, रामबीर, वीरपाल, रमेश, राकेश शर्मा व डा. रघुवीर सिंह ने अपने विचार रखे।
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