देश की रक्षा करने वाले जवानों के बुलेट प्रूफ जैकेट के बोझ को हल्का करने के बाद अब सिर का भार भी कम करने की तैयारी शुरू हो गई है।
सेना की कुछ कमानों की मांग पर ऐसा किया जा रहा है।
कैबलार फेब्रिक आधारित बुलेट प्रूफ हेलमेट और पटके को स्टील आधारित बनाकर इसे अब तक का सबसे हल्का और असरदार (मारक क्षमता सहने वाला) बनाने की तैयारी है।
फरीदाबाद की एक कंपनी ने मशहूर स्टील वैज्ञानिक के साथ इस प्रोजेक्ट पर शोध शुरू किया है।
400 से 500 ग्राम तक घटेगा वजन
नई तकनीक से हेलमेट व पटके के दाम भी घट जाएंगे। विशेष जोर हेलमेट पर दिया जा रहा है। नए शोध से हेलमेट का वजन 400 से 500 ग्राम तक कम होने की संभावना है। इस समय 1500 से 1600 ग्राम का हेलमेट होता है।
कैबलार की जगह फेंटम स्टील में टाइटेनियम और जिरकेनियम नामक मिश्र धातुओं को मिलाकर हेलमेट तैयार किया जाएगा।
प्लेट की थिकनेस कम रहेगी और स्ट्रेंथ भी बढ़ जाएगी। टाइटेनियम और जिरकेनियम की डेंसिटी (घनत्व) स्टील से लगभग आधी होती है।
कंपनी सूत्रों के मुताबिक लाइटवेट हेलमेट बनाने की खोज करना जरूरी हो गया है। जिससे जवान अधिक सुरक्षित रहें और पहनकर आसानी से दौड़ भाग कर सकें।
इस बारे में जब फेंटम स्टील ईजाद करने वाले स्टील वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल से बातचीत की गई तो उन्होंने बस इतना बताया कि जवानों की सहूलियत के लिए वह लोग निरंतर शोध कर रहे हैं।
नए शोध से क्या होगा बदलाव
जिरकेनियम, टाइटेनियम मिलाने से बुलेट प्रूफ स्टील प्लेट की हार्डनेस 500 बीएचएन (ब्रिनेल हार्डनेस नंबर) से बढ़कर 600 या उससे ज्यादा हो जाएगी।
कैबलार के प्लेट की थिकनेस अभी के 2.2 से घटकर 1.6 एमएम तक कम हो सकती है।
मार सहने की होगी क्षमता
पटका: एके-47: 730 मीटर/सेकेंड की गति से निकलती है गोली।
हेलमेट: 9 एमएम कारबाइन: 420 मीटर/सेकेंड की गति से निकलती है गोली।
कैबलार फेब्रिक आधारित हेलमेट का दाम 6000 रुपए है। शोध के बाद इसमें 25-30 फीसदी तक कमी आ सकती है।