हरियाणा के नारनौल में तीन साल से बंद पड़ी दोहान और कृष्णावती नदियों में बजरी की खानों के लिए नारनौल माइनिंग कार्यालय में शनिवार को बोली हुई।
बंद पड़ी खानों की बोली से सरकार को करोड़ों का राजस्व मिलेगा। नारनौल में बजरी के लिए कुल 364.54 हेक्टेयर भूमि पर खनन के लिए ठेका छोड़ा गया है।
अतिरिक्त उपायुक्त प्रभजोत सिंह की अध्यक्षता में बोली प्रक्रिया में हरियाणा के अलावा दूसरे राज्यों से भी करीब 30 आवेदकों ने बोली प्रक्रिया में मार्जिन मनी जमा करवाई थी।
दो फर्मों ने तीन यूनिटों में 28 करोड़ 30 लाख रुपये प्रतिवर्ष की बोली पर ठेका प्राप्त किया है। जिला खनन अधिकारी राजेश सांगवान के अनुसार तीन यूनिटों के रूप में दोहान एवं कृष्णावती नदियों का ठेका छोड़ा गया है।
सांगवान ने बताया कि सरकार को प्रतिवर्ष 28 करोड़ 30 लाख रुपये की आय होगी और हर तीन वर्ष बाद इन रेटाें में 25 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान रखा गया है।
ठेके की प्रक्रिया को पूरी करवाने के लिए प्रशासन की तरफ से एडीसी प्रभजोत सिंह के अलावा चंडीगढ़ से माइनिंग अधिकारी नीरज कुमार, इंस्पेक्टर आरके शर्मा, सहायक निदेशक नारनौल झाबर सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण बोर्ड दिनेश कुमार, ईटीओ अनिल कुमार उपस्थित थे।
इतने में छूटा ठेका
यूनिट-एक का ठेका ओम मिनरल्स सोनीपत के नाम सात वर्ष के लिए छोड़ा गया है, जिसमें दो गांव आजमाबाद मौखुता एवं बामनवास के 43.36 हेक्टेयर में रिजर्व प्राइस 14 लाख रखी गई थी, जबकि बोली तीन करोड़ 6 लाख रुपये वार्षिक में बोली छोड़ी गई है।
यूनिट-दो का ठेका स्टीम इंफ्रा बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड जयपुर के नाम दस साल के लिए छोड़ा गया है। इसमें शामिल बीस गांवों के लिए रिजर्व प्राइस दो करोड़ रुपये रखे गए थे, जबकि इनका ठेका 14 करोड़ वार्षिक में छूटा है।
यूनिट-तीन का ठेका ओम मिनरल्स सोनीपत को 9 साल के लिए दिया गया है, जिसमें शामिल 17 गांव के लिए एक करोड़ 16 लाख रुपये रिजर्व प्राइस रखा गया था, जबकि यह ठेका 11 करोड़ 51 लाख रुपये वार्षिक पर छूटा है।