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चैत्र नवरात्र के महासप्तमी को करे मां कालरात्रि का पूजन : भारद्वाज

Mon, 15 Apr 2024 01:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो संख्या:60- गांव सिसोठ में ​स्थापित माता भूरा भवानी मूर्ति--स्रोत--संवाद
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महेंद्रगढ़। नवरात्र पर माता कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को काल से बचाती हैं। सोमवार को महासप्तमी रहेगी। इस दिन माता के सातवें रूप कालरात्रि की पूजा की जायेगी।
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पंडित राहुल भारद्वाज ने बताया कि माता कालरात्रि को ही महायोगीश्वरी, महायोगिनी और शुभंकरी कहा गया है। मां कालरात्रि की विधिवत पूजा अर्चना करने से माता अपने भक्तों को काल से बचाती हैं अर्थात माता के भक्त को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। माता कालरात्रि से ही सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसलिए तंत्र मंत्र के साधक मां कालरात्रि के विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं। मां कालरात्रि की विधिवत पूजा अर्चना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और भूत प्रेत सहित सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और शत्रुओं व दुष्टों का संहार कर सभी दुख दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। माता की पूजा रात्रि के समय विशेष होती है।
असुर शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने सभी लोकों में हाहाकार मचा रखा था, इससे चिंतित होकर सभी देवी देवता महादेव के पास गए और उनसे रक्षा की प्रार्थना करने लगे। तब महादेव ने माता पार्वती से असुरों का अंत कर अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा। महादेव की बात मानकर माता पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया। जब मां दुर्गा ने दैत्य रक्तबीज को मौत के घाट उतारा, तो उसके शरीर से निकलने वाले रक्त से लाखों रक्तबीज दैत्य उत्पन्न हो गए। यह देखकर मां दुर्गा ने को भयंकर क्रोध आ गया। क्रोध की वजह से मां का वर्ण श्यामल हो गया था। इसी श्यामल स्वरूप से देवी कालरात्रि का प्राकट्य हुआ। इसके बाद जब मां कालरात्रि ने दैत्य रक्तबीज का वध किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को मां कालरात्रि ने जमीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में भर लिया। इस तरह सभी असुरों का अंत किया गया। काले रंग रूप और अपनी विशाल केश राशि को फैलाकर चार भुजाओं वाली दुर्गा हैं एक हाथ में शत्रुओं की गर्दन पकड़कर और दूसरे हाथ में खड़क तलवार से युद्ध स्थल में उनका नाश करने वाली कालरात्रि अपने विराट रूप में नजर आती हैं। इनकी सवारी गर्दभ यानि गधा है, जो समस्त जीव-जन्तुओं में सबसे ज्यादा परिश्रमी और निर्भय होकर अपनी अधिष्ठात्री देवी कालराात्रि को लेकर इस संसार में विचरण करा रहा है। मां कालरात्रि को गुड़ अतिप्रिय है तो इस दिन गुड़ का भोग लगाना चाहिए।
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