फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahendragarh-Narnaul News: महिलाएं चूल्हा-चौका, बेटियां पढ़ाई छोड़ खाद लेने के लिए लाइन में लगीं

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में पिछले कुछ दिनों से यूरिया खाद की समस्या बनी हुई है। किसानों को उनकी रबी की फसल के लिए खाद नहीं मिल रहा। खाद की कमी के चलते घर बंद कर अन्नदाता का परिवार लाइनों में खड़ा है। महिलाएं चूल्हा-चौका और बेटियां पढ़ाई छोड़कर खाद लेने पहुंच रही हैं। दिनभर भूखे प्यास लाइनों में खड़े रहकर टोकन मिल रहा है तथा अगले दिन घंटों लाइन में खड़े रहकर दो बैग खाद के मिल रहे हैं। यानी दो दिन तक करीब दस घंटे लाइनों में खड़े रहने पर खाद के मात्र दो बैग एक आधार कार्ड पर दिए जा रहे हैं। किसान के अनुसार इतना खाद उनके लिए पर्याप्त नहीं है। नवंबर माह तक 22636 मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता है सरकार की ओर से अभी तक लगभग 15 हजार मीट्रिक टन खाद किसानों में वितरित किया गया है।
विज्ञापन

बता दें कि रबी की फसल सरसों एवं गेहूं की फसल में खाद डालने का समय चल रहा है। किसान प्रतिदिन सुबह छह बजे खाद लेने के लिए दी महेंद्रगढ़ कोऑपरेटिव सोसाइटी, अनाज मंडी नारनौल पहुंच रहे हैं। खाद की समस्या अधिक होने की वजह से पिछले तीन चार दिनों से किसान का पूरा परिवार लाइन में आकर खड़ा हो रहा है। महिलाएं रसोई का काम छोड़कर खाद के लिए लाइन में खड़ी हैं वहीं स्कूल कॉलेज में पढ़ाई करने वाले बच्चे भी माता पिता की सहायता के लिए खाद लेने पहुंच रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। वीरवार को पुलिस लाइन में खाद का वितरण किया गया जहां पर किसानों की अलग-अलग दो लाइनें बनाई गई थीं। एक लाइन में टोकन तथा दूसरी लाइन खाद लेने वाले किसानों की थी। शाम पांच बजे तक खाद का वितरण चलता रहा। एक आधार कार्ड पर मात्र यूरिया खाद के दो बैग दिए जा रहे थे। शाम तक लगभग 560 बैग वितरित किए गए थे।
चार दिन से कॉलेज नहीं जा पाई। सुबह से शाम तक लाइन में लगकर खाली हाथ घर जाना पड़ता है। पुलिस कर्मचारी अपने चहेतों को लाइन में आगे कर रहे हैं। कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। -ज्योति, गांव सराय
विज्ञापन

खाद लेने के लिए रोजाना गांव से सुबह चार बजे आकर बैठना पड़ता है लेकिन किसानों को खाद नहीं मिल रहा है। किसान पूरा दिन खाद लेने के लिए पुलिस लाइन में खड़े रहकर शाम को खाली हाथ घर लौट रहे है। सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए। -राजकुमार, नीरपुर।
कभी टोकन के लिए लाइन में लगा रहे हैं तो कभी बैग लेने के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। किसान की दुर्दशा हो रही है लेकिन सरकार जरा भी ध्यान नहीं दे रही है। किसान खाद लेने के लिए सर्दी के मौसम में भी सुबह आकर लाइन में लग रहा है। -रामनिवास कोरियावास ।
आज एक गाड़ी खाद की आई थी जो किसानों को वितरित कर दी गई है। वीरवार को एक आधार कार्ड पर दो बैग दिए गए हैं। आज किसानों की भीड़ अधिक नहीं थी। खाद आराम से बंट गया था। शुक्रवार को खाद आएगा तो बांट दिया जाएगा।- रोशन लाल, कोऑपरेटिव सोसाइटी, नारनौल।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें