नारनौल। करीब 450 वर्ष पुरानी मिर्जा अलीजान की बावली का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसके तहत हुई खोदाई के दौरान पानी का सोता फूट पड़ा और बावली में फिर पानी भर गया है। बावली में एक माह से पानी आ रहा है।
बावली के पास खोदे गए कुएं में भी रिस-रिस कर पानी आ रहा है। बावली के नीचे की सफाई करने के लिए इंजन के माध्यम से पानी निकाला जा रहा है लेकिन कुछ समय बाद पानी फिर से भर जाता है। लोक निर्माण विभाग ने अभी पानी कहां से आ रहा है इसको बताने में असमर्थता जाहिर की है। एक अंदाजा यह भी लगाया जा सकता है कि बावली से 70-80 मीटर दूरी पर छोटा-बड़ा तालाब है जो पानी से भरा हुआ है। उसका पानी भी अंदरूनी रूप से आ सकता है। अच्छी बात है कि पुराने समय भी बावली पानी से भरी होती थी। अब इसमें पानी आ गया है।
मुगल सम्राट अकबर के शासन काल में 1556-1605 ई. में नारनौल के अंदर मिर्जाअली जान ने बावली का निर्माण कराया था। बावली के मुख्य धनुषाकार प्रवेश द्वारा के ऊपर एक आयताकार छतरी है जो धूसर पत्थरों से बनी आठ खंभों पर टिकी है। बावली के प्रवेश द्वार पर ही तख्त स्थित है। दक्षिण दिशा में मुख्य धनुषाकार प्रवेश द्वारा तीन मंजिला बाउली और एक कुएं के साथ जुड़ा हुआ है। इस कुएं के माध्यम से इस बावली में पानी मुहैया करवाया जाता था। यह बावली जर्जर हो गई थी। कुछ समय पहले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओमप्रकाश यादव ने बावली के जीर्णोद्धार करवाकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया था। सरकार की ओर से तख्त बावली तथा बीरबल का छत्ता दोनों को लगभग 3.5 करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार करने की मंजूरी दी थी। अभी तख्त बावली पर लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 1.79 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है। लगभग तीन महीने पहले इस पर काम शुरू हुआ था। पहले फेज का काम पूरा भी हो गया। चुने से ही तख्त बावली को पुराना स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। बावली के फर्श पर जयपुर से मंगवाए गए लाल पत्थर लगाए गए हैं। 20 मार्च 2023 तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
-
खोदाई में निकले दो फव्वारे
बावली परिसर में खोदाई के समय दो फव्वारे भी निकले हैं। एक बड़ा फव्वारा तख्तबावली के गेट से पहले बना हुआ है। इसकी आकृति षडभुजाकार है। एक छोटा फव्वारा ओर निकला है जिसका पानी का जुड़ाव एक नाले के रूप में झरने से किया गया है। अभी इनकी मरम्मत का कार्य चल रहा है। पुराने समय में भी फव्वारे होते थे जो आकर्षण का केंद्र होते थे। इसके अंदर 14 दरगाह भी हैं। ये दरगाह किस की है इसके बारे में कुछ लिखा नहीं है।
बावली में कुआं, तख्त बाउली, दरगाह, झरना और फव्वारा है।
-
वर्जन:
खोदाई करने पर बावली में पानी आ रहा है। सफाई के लिए यह पानी निकाला जा रहा है लेकिन पानी कहां से आ रहा है इसके बारे में कुछ नहीं बताया जा सकता।- अश्वनी गहलावत, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग।